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राजनीति

एकतरफा कार्रवाई का विरोध: बाबूलाल मरांडी ने सदर सीओ कार्यालय पहुंचकर जताया आक्रोश

झारखंड की राजनीति में एक बार फिर गरमागरम माहौल देखने को मिला है। वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ प्रशासन द्वारा की जा रही एकतरफा कार्रवाई के विरोध में मोर्चा खोल दिया है और सदर सीओ कार्यालय पहुंचकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

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Ankit Yadav
26 अग 2026, 16:52
एकतरफा कार्रवाई का विरोध: बाबूलाल मरांडी ने सदर सीओ कार्यालय पहुंचकर जताया आक्रोश
राज्य की राजधानी रांची सहित विभिन्न हिस्सों में इन दिनों प्रशासनिक रवैये को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। हाल ही में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस और प्रशासनिक तंत्र द्वारा उठाए गए कदमों पर सवाल उठने लगे हैं। इसी कड़ी में प्रमुख विपक्षी नेताओं में शुमार और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी खुलकर छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे युवाओं के विरुद्ध मनमाने ढंग से दंडात्मक कदम उठा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। इसी सिलसिले में उन्होंने खुद सक्रिय कदम उठाते हुए सीधे सदर अंचल अधिकारी (सीओ) कार्यालय का रुख किया और वहां पहुंचकर इस एकतरफा कार्यशैली के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शित किया।

छात्र आंदोलनों और प्रशासनिक रवैये पर सियासत तेज

राजनीतिक गलियारों में इस घटना के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। जानकारों का मानना है कि छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब बड़े राजनीतिक मुद्दों का रूप लेता जा रहा है। जब भी युवा अपने भविष्य, रोजगार या अन्य बुनियादी मुद्दों को लेकर आवाज उठाते हैं, तो कई बार स्थिति असहज हो जाती है। मरांडी का यह दौरा इस बात का संकेत है कि विपक्ष इस मसले को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है और सरकार तथा स्थानीय प्रशासन को घेरने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता है। कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखना और विरोध जताना इस बात को साबित करता है कि राजनीतिक दल इस संवेदनशील मोर्चे पर पूरी तरह से हमलावर मुद्रा में आ चुके हैं। मौके पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और छात्रों पर दर्ज किए गए मामलों को तत्काल वापस लेने की पुरजोर मांग उठाई। नेताओं का कहना है कि सरकार युवाओं की आवाज को दबाने के लिए पुलिस बल का गलत इस्तेमाल कर रही है, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में ज्ञापन प्राप्त कर उच्चाधिकारियों तक बात पहुंचाने का आश्वासन दिया है, हालांकि विपक्षी खेमा इस बात पर अड़ा हुआ है कि जब तक न्यायोचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन किसी न किसी रूप में जारी रहेगा। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम के तूल पकड़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है। विभिन्न छात्र संगठनों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए अपनी एकजुटता दिखाई है। प्रशासन के समक्ष आई इस चुनौती से निपटने के लिए अब स्थानीय अधिकारियों को भी फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा, क्योंकि मामला सीधे तौर पर युवा वर्ग और विपक्षी दल के दिग्गजों से जुड़ा हुआ है। जनता और मीडिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में प्रशासन इस विरोध के बाद अपनी नीतियों में कोई नरमी बरतता है या फिर टकराव का यह दौर और अधिक गहराता चला जाता है।
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