Lucknow Desk : सबको गाली, सबका अपमान - समाजवादी पार्टी की यही पहचान जैसे नारों वाले पोस्टरों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है। मेरठ, बागपत, हापुड़, गाजियाबाद से लेकर राजधानी लखनऊ तक लगाए गए इन पोस्टरों में समाजवादी पार्टी के नेताओं के पुराने बयानों को मुद्दा बनाकर पार्टी पर जातिवादी राजनीति और विवादित भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। पोस्टरों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के उस कथित बयान का भी जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी को लेकर ‘चवन्नी’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी से जोड़े जा रहे ‘ब्राह्मण, वेश्या की तरह’ वाले विवादित बयान को भी पोस्टर में प्रमुखता से दिखाया गया है।
पोस्टर में शिवपाल यादव के कथित ‘राजभर-निषाद नीच’ वाले बयान का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही ठाकुर और ब्राह्मण समाज को लेकर लगाए गए आरोपों को भी पोस्टर के जरिए सामने रखा गया है। इन पोस्टरों में पूरे मामले को ‘जातिवादी सफाई’ के मुद्दे से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति का खास प्रभाव माना जाता है। ऐसे में जाटलैंड कहे जाने वाले इलाकों में इस तरह के पोस्टर लगने से राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
मेरठ और आसपास के जिलों के साथ लखनऊ में भी पोस्टर लगाए जाने से मामला स्थानीय राजनीति से निकलकर प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, पोस्टर किस संगठन या समूह की ओर से लगाए गए हैं, इसे लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि समाजवादी पार्टी इन आरोपों और पोस्टरवार का किस तरह जवाब देती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और गर्म होने की संभावना है।