लखनऊ में दीक्षांत समारोह के दौरान संबोधन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में आयोजित किया गया था जहाँ उन्होंने युवा विधि स्नातकों को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले क्षेत्र में माफिया का काफी जोर हुआ करता था, लेकिन अब पूरी तरह से कानून का शासन स्थापित किया जा चुका है। यही बदलाव निवेश आकर्षित करने और आम जनता का भरोसा मजबूत करने का मुख्य आधार बना है। अतीत में इस क्षेत्र को बीमारू राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था और यहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए जाते थे। हालांकि मजबूत दृढ़निश्चय और ठोस कार्यनीति के बल पर वर्तमान परिस्थिति में व्यापक सुधार देखने को मिला है। आज के समय में यह राज्य देश की अग्रणी तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुका है और लगातार सरप्लस रेवेन्यू की स्थिति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल बड़ी सड़कों या एक्सप्रेसवे का निर्माण कर देने भर से राष्ट्र के विकास की परिकल्पना पूरी नहीं हो सकती है। इसके लिए समाज के हर तबके को न्याय मिलना बेहद आवश्यक है।
आर्थिक प्रगति और सुधारों की दिशा में कदम
वर्ष 2013 के दौरान भारत दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था, जबकि वर्तमान में यह दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है। वैश्विक स्तर पर देश की इस छलांग ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा काफी हद तक मजबूत किया है। इसी तर्ज पर अब राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक विशेष विजन दस्तावेज जारी किया जा चुका है और उसके अनुरूप कार्ययोजना भी लागू कर दी गई है। पूरा विश्वास जताया गया है कि निर्धारित समय सीमा यानी वर्ष 2029 से 2030 तक इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर लिया जाएगा। केंद्र सरकार के स्तर पर सुधार प्रक्रिया को तेज करते हुए डेढ़ हजार से अधिक पुराने और बेकार हो चुके कानूनों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा जन विश्वास अधिनियम की मदद से बयालीस विभिन्न कानूनों के कुल 183 प्रावधानों के तहत छोटी मोटी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी, अनुच्छेद 370 से जुड़े बदलाव तथा नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम उठाए गए हैं। यह साबित करता है कि सुधारों का मतलब केवल नए नियम बनाना नहीं बल्कि पुराने अनुपयोगी नियमों को हटाना भी होता है।
तकनीक का दौर और भविष्य की चुनौतियां
आधुनिक युग में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अपराध करने के तरीकों और सबूत जुटाने के पैटर्न को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। एआई की मदद से शोध करना और आंकड़ों का विश्लेषण करना आसान हुआ है, लेकिन साथ ही डीपफेक जैसी नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता जांचने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करना अब अनिवार्य हो गया है क्योंकि साइबर अपराधी आसानी से किसी की भी जीवनभर की कमाई उड़ा लेते हैं। इन सभी समस्याओं से निपटने के लिए राज्य के सभी 75 जिलों में साइबर थानों का गठन किया गया है। इसके अलावा कुल 1583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क सक्रिय किए गए हैं और फॉरेंसिक संस्थान भी स्थापित किया गया है। युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए एआई प्रज्ञा कार्यक्रम के अंतर्गत दस लाख युवाओं को डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नए कानूनों के तहत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को मान्यता दी गई है और सात वर्ष से अधिक सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य कर दिया गया है। अंत में उन्होंने छात्रों से चार मुख्य आग्रह किए जिनमें अन्याय के खिलाफ खड़े रहना, अपनी जड़ों से जुड़े रहना, नैतिक चरित्र बचाए रखना और लगातार नए संशोधनों से अपडेट रहना शामिल है।