Lucknow Desk: लखनऊ से बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ शुरू की गई विजिलेंस जांच को रद्द कर दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस राजीव सिंह की अदालत में हुई। अभिषेक प्रकाश ने अपने खिलाफ शुरू की गई जांच को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। गुरुवार को अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने 20 मार्च 2025 और 28 मार्च 2025 को जारी किए गए सरकारी आदेशों के आधार पर शुरू हुई जांच की कार्रवाई को निरस्त कर दिया।
अभिषेक प्रकाश उत्तर प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास विभाग के सचिव रह चुके हैं। इसके अलावा वह इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। कंपनी अधिकारी की शिकायत से जुड़ा था मामला यह पूरा मामला एक कंपनी के अधिकारी की ओर से 20 मार्च 2025 को की गई शिकायत से जुड़ा था। शिकायत में इन्वेस्ट यूपी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का भी जिक्र किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इन्वेस्ट यूपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें निकांत जैन नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर दिया था। इसके बाद प्रोजेक्ट को कमेटी और कैबिनेट से मंजूरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर प्रोजेक्ट की कुल रकम का 5 फीसदी हिस्सा मांगे जाने का आरोप लगाया गया था।
शिकायत के बाद मामले को लेकर सरकारी स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई और विजिलेंस जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी जांच को लेकर IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश ने हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट के फैसले के बाद जांच पर सवाल हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद अभिषेक प्रकाश की याचिका मंजूर कर ली। अदालत ने 20 और 28 मार्च 2025 के सरकारी आदेशों के आधार पर शुरू की गई जांच की कार्रवाई को निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद अभिषेक प्रकाश के खिलाफ इस मामले में शुरू की गई विजिलेंस जांच को लेकर चल रही कार्रवाई पर रोक लग गई है। फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले को IAS अधिकारी के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। मामला शिकायत में लगाए गए आरोपों और उसके आधार पर शुरू हुई जांच से जुड़ा था।