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लखनऊ के 88 गांवों में पानी के संकट पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को तेजी से कदम उठाने के निर्देश

पांच वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की प्रक्रिया जल्द पूरी करने और 30 झीलों के पुनरुद्धार पर भी जोर

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Administrator
26 अग 2026, 15:05
लखनऊ के 88 गांवों में पानी के संकट पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को तेजी से कदम उठाने के निर्देश

Lucknow Desk : लखनऊ के 88 गांवों में गहराते जल संकट को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को गंभीरता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पानी हर व्यक्ति की मूलभूत जरूरत है। ऐसे में ग्रामीणों को जल संकट से राहत देने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने के साथ-साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी तेजी से काम करना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। मामले की सुनवाई में अदालत को बताया गया कि लखनऊ के 88 गांवों में पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए पांच वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने प्रस्तावित हैं। इनमें से एक प्लांट के लिए बख्शी का तालाब क्षेत्र के नगवामऊ गांव में जिलाधिकारी की ओर से जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है।

हालांकि, इस परियोजना के लिए राज्य सरकार से प्रशासनिक स्वीकृति और खर्च की मंजूरी अभी बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) की ओर से प्लांट का निर्माण कराया जाएगा। सुनवाई के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि बाकी चार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए अभी जमीन का आवंटन नहीं हुआ है। इस स्थिति पर अदालत ने जिलाधिकारी को मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि जल संकट जैसी गंभीर समस्या से जुड़े स्थायी प्रोजेक्ट में बेवजह देरी नहीं होनी चाहिए। अदालत ने तत्काल राहत के उपायों पर भी जोर दिया।

इसके तहत लखनऊ के 88 गांवों में चिन्हित 30 झीलों के पुनरुद्धार को लेकर जल्द फैसला लेने और काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट का मानना है कि झीलों और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण से ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हाईकोर्ट ने सरकार से साफ तौर पर कहा है कि ग्रामीणों की परेशानी को संवेदनशीलता के साथ समझते हुए प्रभावी कदम उठाए जाएं। अदालत ने दीर्घकालिक योजनाओं के साथ तत्काल राहत की व्यवस्था पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई है। अब प्रशासन और सरकार की कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर है। उम्मीद है कि जमीन आवंटन, प्रशासनिक मंजूरी और बजट से जुड़ी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कर जल संकट से प्रभावित गांवों में ठोस राहत पहुंचाई जाएगी।

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