Lucknow Desk : लखनऊ में लगातार बढ़ रही ई-रिक्शों की संख्या अब हाईकोर्ट के संज्ञान में भी पहुंच गई है। शहर में करीब 80 हजार ई-रिक्शों के संचालन और इससे बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार से स्पष्ट नीति की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा कि राजधानी की सड़कों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में सरकार को इस समस्या का समाधान निकालने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। यह मामला लखनऊ की यातायात व्यवस्था से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका सूरज सिंह विसेन की ओर से दाखिल की गई है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि लखनऊ में इस समय करीब 80 हजार ई-रिक्शे चल रहे हैं।
इतनी बड़ी संख्या में ई-रिक्शों के लिए शहर में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है। इसके चलते कई प्रमुख सड़कों, चौराहों और बाजारों के आसपास ई-रिक्शे खड़े रहते हैं। इससे कई स्थानों पर यातायात प्रभावित होने और जाम की स्थिति बनने की समस्या सामने आ रही है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी सड़क की अपनी एक निश्चित क्षमता होती है। एक सड़क पर एक समय में सीमित संख्या में ही वाहन सुचारु रूप से चल सकते हैं। अगर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती रहे तो इसका सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ता है। ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या के मामले में भी इसी तरह की स्थिति बन रही है। पीठ ने सरकार से जानना चाहा कि ई-रिक्शों की संख्या और उनके संचालन को व्यवस्थित करने के लिए क्या योजना तैयार की जा रही है।
कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार इस समस्या को केवल देखते हुए निष्क्रिय नहीं रह सकती। शहर में यातायात को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह अपर मुख्य सचिव, परिवहन से सरकार की प्रस्तावित नीति के संबंध में स्पष्ट जानकारी और निर्देश प्राप्त करें। अब सरकार को अदालत के सामने यह बताना होगा कि ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या, उनके संचालन और पार्किंग को लेकर किस तरह की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद माना जा रहा है कि लखनऊ में ई-रिक्शों के संचालन को लेकर आने वाले दिनों में नए नियम या व्यवस्था लागू हो सकती है। फिलहाल सरकार की ओर से पेश की जाने वाली नीति पर सभी की नजर है। राजधानी में यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए ई-रिक्शों की संख्या, रूट और पार्किंग को लेकर क्या फैसला होता है, यह आने वाले समय में साफ होगा।