कंटाप
NEWS
गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      Rain Alert: बन गया है कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में होने जा रही मूसलाधार बारिश, आंधी तूफान का भी अलर्ट      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      'पाकिस्तान को अलग-थलग नहीं कर सकता भारत', मार्को रुबियो के बयान पर बोले पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट      ट्रंप के मुस्लिम शहर वाले बयान पर भड़के मैक्रों, कहा- मूर्खतापूर्ण...      PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      सोनम वांगचुक का केंद्र पर आरोप, बोले- लद्दाख से किए वादे पूरे करे सरकार     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
राजनीति

ओबीसी आरक्षण मामला: राज्य सरकार जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी

मध्यप्रदेश सरकार राज्य में ओबीसी आरक्षण को लेकर आए जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय जाने की तैयारी कर रही है। कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने स्पष्ट किया है कि कानूनी लड़ाई के जरिए सरकार अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।

A
Ankit Yadav
10 अक्ट 2026, 14:21
ओबीसी आरक्षण मामला: राज्य सरकार जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी

हाईकोर्ट फैसले के बाद सरकार का कदम

मध्यप्रदेश राज्य सरकार ने जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण के संबंध में दिए गए हालिया फैसले पर असंतोष जताते हुए अब उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने इस संवैधानिक रूप से संवेदनशील मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार अदालत में अपना रुख अत्यंत मजबूती के साथ पेश करेगी। उन्होंने साफ कर दिया है कि ओबीसी वर्ग के हितों को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का हर स्तर पर पालन किया जाएगा। हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य में आरक्षण नीति को लेकर जारी लंबे विवाद का हिस्सा है। सरकार भविष्य में आरक्षण से जुड़ी चुनौतियों और नियुक्तियों के समायोजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ठोस कदम उठाने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस जटिल मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास किया था ताकि अदालत में सरकार की बात को एक राय के साथ रखा जा सके। अब पूरी स्थिति पर शीर्ष अदालत के रुख का इंतजार किया जा रहा है।

आरक्षण विवाद पर मंत्री प्रहलाद पटेल की टिप्पणी

कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने आरक्षण विवाद के लिए पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक लाभ लेने की जल्दबाजी में 27 प्रतिशत आरक्षण का अध्यादेश तो जारी कर दिया, लेकिन उसके लिए आवश्यक संवैधानिक आधार तैयार करने में विफल रही। पटेल ने बताया कि उस दौर में पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्राप्त था, फिर भी तत्कालीन सरकार ने आयोग से राय लेना उचित नहीं समझा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को पार करने के लिए सरकार ने अदालत के समक्ष कोई ठोस आधार पेश नहीं किया था। मंत्री ने कांग्रेस से सवाल किया कि आखिर कानूनी लड़ाई के दौरान संवैधानिक सीमाओं और प्रावधानों पर पर्याप्त विमर्श क्यों नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब अपनी पिछली गलतियों की जिम्मेदारी लेने से बच रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार हमेशा पिछड़े वर्ग के उत्थान और उन्हें संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करती रही है।

नियुक्तियों पर फैसला और भविष्य की रणनीति

जबलपुर हाईकोर्ट के वर्तमान फैसले में वर्ष 2019 से 2022 के बीच की गई नियुक्तियों को सुरक्षित रखने संबंधी व्यवस्था पर मंत्री प्रहलाद पटेल ने संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले से कार्यरत हैं, उन्हें नौकरी से न हटाने का निर्णय पूरी तरह से उचित है। ओबीसी वर्ग के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले पर कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने सहित अन्य विषयों पर पार्टी ने हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई है। राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में पूरी तैयारी के साथ जाएगी ताकि आरक्षण के कानूनी पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। इस पूरे घटनाक्रम का उद्देश्य राज्य में ओबीसी आरक्षण के संवैधानिक ढांचे को कानूनी रूप से मजबूत करना है ताकि भविष्य में नियुक्तियों और समायोजन को लेकर कोई अनिश्चितता न रहे। सरकार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से इस मामले में स्पष्टता आएगी और पिछड़े वर्गों को उनके अधिकारों का लाभ नियमानुसार मिल पाएगा।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज