पैतृक आवास पर निभाई गई दिवंगत मां की श्राद्ध रस्म
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार दस अक्टूबर की सुबह रामगढ़ जिले के नेमरा गांव स्थित अपने पैतृक आवास पर एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान संपन्न किया। यह पारंपरिक श्राद्ध रस्म उन्होंने अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की स्मृति में पूरी निष्ठा के साथ निभाई। स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार दिवंगत परिजन की याद में सुबह और शाम के वक्त यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। इसी प्रक्रिया का पालन करते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी मां के निमित्त दातून, पीने का पानी और भोजन पूरी श्रद्धा के साथ परोसा। इस धार्मिक और पारंपरिक आयोजन के दौरान उनके परिवार के अन्य सदस्य भी वहां उपस्थित रहे जिन्होंने इस अनुष्ठान में अपनी सहभागिता दर्ज की। नेमरा गांव स्थित इस पैतृक घर में इस विधि के पूरे होने से वहां का माहौल काफी भावुक और गंभीर नजर आया। स्थानीय मान्यताओं और ग्रामीण संस्कृति का निर्वहन करते हुए परिवार के सभी लोगों ने इस अनुष्ठान को समय पर पूरा किया।
अस्पताल में उपचार के दौरान हुआ था मां का निधन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन का निधन सात अक्टूबर दो हजार छब्बीस की रात को रांची के एक निजी चिकित्सालय में हुआ था। उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ महसूस हो रही थी जिसके कारण अठारह सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उन्होंने उसी चिकित्सालय में रात्रि लगभग आठ बजकर तीस मिनट पर अपनी अंतिम सांस ली। इसके अगले दिन यानी आठ अक्टूबर दो हजार छब्बीस को उनका अंतिम संस्कार रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में ही संपन्न किया गया था। शोक के इस कठिन समय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं अपनी माताजी को मुखाग्नि दी थी। इस अंतिम संस्कार कार्यक्रम में उनके परिवार के सभी नजदीकी सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हुए थे। इसके अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि तथा राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े कई प्रतिष्ठित लोग भी इस दुखद अवसर पर नेमरा पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके हैं।
पारंपरिक मान्यताओं के पालन का सिलसिला और पारिवारिक शोक
पारिवारिक सूत्रों और स्थानीय संस्कृति के जानकारों के अनुसार इस प्रकार के रीति-रिवाज ग्रामीण समाज में गहरे रचे-बसे हैं जिनका पालन परिवार के लोग पूरी श्रद्धा से करते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा शनिवार को सुबह के वक्त दातून और पानी परोसने की यह प्रक्रिया उसी सनातन परंपरा का हिस्सा है जो निधन के बाद निभाई जाती है। माता के प्रस्थान के बाद से ही पूरा सोरेन परिवार और उनके पैतृक गांव नेमरा में शोक की लहर बनी हुई है। दूर-दूर से लोग इस परिवार को सांत्वना देने और अपनी संवेदना प्रकट करने के लिए लगातार पहुंच रहे हैं। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों के कई दिग्गज भी इस दुखद घड़ी में मुख्यमंत्री के परिवार के साथ खड़े नजर आए हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान परिवार के प्रत्येक सदस्य ने परंपरा के नियमों का सख्ती से पालन किया और अपनी मां की याद में आयोजित इन तमाम धार्मिक अनुष्ठानों को पूरी गंभीरता के साथ संपन्न किया।