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राजनीति

राजघाट पर विपक्ष का प्रदर्शन: सरकार की सद्बुद्धि के लिए की विशेष प्रार्थना

विपक्षी गठबंधन इंडिया के नेताओं ने निर्वाचन आयोग के कामकाज के विरोध में राजघाट पर मौन प्रार्थना की। वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन सड़कों पर उतरे हैं।

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Ankit Yadav
09 अक्ट 2026, 11:49
राजघाट पर विपक्ष का प्रदर्शन: सरकार की सद्बुद्धि के लिए की विशेष प्रार्थना

महात्मा गांधी की समाधि पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा

विपक्षी गठबंधन इंडिया से जुड़े प्रमुख नेताओं ने बृहस्पतिवार को नई दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह घटनाक्रम निर्वाचन आयोग से जुड़ी शिकायतों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों की कड़ी का तीसरा हिस्सा है। दोपहर करीब तीन बजकर 15 मिनट पर गठबंधन के सदस्य तीन बसों में सवार होकर कनॉट प्लेस के एक रेस्तरां से राजघाट पहुंचे थे। राजघाट परिसर में पहुंचते ही सभी नेताओं ने बापू की समाधि के सामने कुछ देर मौन व्रत धारण किया और फिर पुष्प अर्पित कर अपनी बात रखी। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, अभिषेक बनर्जी, राजीव राय और मोहिबुल्ला नदवी समेत अनेक दलों के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। वहां मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और वामपंथी छात्र संगठनों जैसे आइसा और एआईएसएफ के समर्थकों ने नारेबाजी और ढोल-डफली के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाना और अपनी मांगों को मजबूती से रखना था। यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन देश के विभिन्न मुद्दों को रेखांकित करने के लिए आयोजित किया गया था।

आयोग के खिलाफ अभियान और नेताओं की मुख्य मांगें

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने स्पष्ट किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा उनकी प्रमुख मांग बनी हुई है। गठबंधन के नेताओं ने आरोप लगाया कि देश में वोट चोरी जैसी घटनाएं हो रही हैं और चुनाव प्रणाली की शुचिता खतरे में है। मल्लिकार्जुन खरगे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए प्रार्थना की है ताकि देश के नागरिकों का वोट देने का अधिकार सुरक्षित रह सके। राहुल गांधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और मोहन भागवत पर आपराधिक साजिश के गंभीर आरोप लगाए। गांधी का कहना था कि लगभग 300 सांसद शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन द्वारा उन्हें लगातार रोका जा रहा है। उन्होंने जंतर-मंतर और निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास पुलिस द्वारा रोके जाने तथा अपने साथियों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने की बात भी कही। विपक्षी नेताओं ने इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए समय मांगा है और वे अभी तक जवाब मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और भविष्य की रणनीति

विपक्ष का यह आंदोलन मंगलवार को संसद से शुरू हुआ था, जब सांसदों ने निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक मार्च करने का प्रयास किया था। बुधवार को सांसदों ने जंतर-मंतर की तरफ मार्च करने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया था। इन प्रदर्शनों में समाजवादी पार्टी की भागीदारी बृहस्पतिवार को विशेष रही, क्योंकि बुधवार को पार्टी का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हो पाया था। दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना के सांसद दिल्ली में उपलब्ध न होने के कारण इस चरण में नहीं जुड़ सके। गठबंधन के नेताओं ने बार-बार सरकार को चेतावनी दी है कि यदि चुनाव प्रणाली में सुधार नहीं किया गया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने त्यागपत्र नहीं दिया, तो उनका यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि संविधान को नष्ट करने और वोट चोरी करने वालों को न्याय के कटघरे में लाना उनकी जिम्मेदारी है। यह निरंतर जारी विरोध देश की राजनीति में एक नए तनाव को दर्शाता है, जहाँ विपक्ष लगातार जवाबदेही की मांग को लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर है।

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