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राजनीति

राजनीतिक भेदभाव का आरोप: महाराष्ट्र सूखा सूची में मंत्रियों के क्षेत्रों को दी गई प्राथमिकता

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सूखाग्रस्त इलाकों के चयन में बड़ा राजनीतिक भेदभाव बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। विपक्षी दल का दावा है कि पहली सूची में सिर्फ मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों को तरजीह दी गई है।

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Ankit Yadav
30 सित 2026, 15:24
राजनीतिक भेदभाव का आरोप: महाराष्ट्र सूखा सूची में मंत्रियों के क्षेत्रों को दी गई प्राथमिकता

सूखा सूची में पक्षपात का गंभीर आरोप

महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों की सूची सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी के विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने मौजूदा राज्य प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का कड़ा आरोप लगाया है। उनका मुख्य दावा है कि सरकार द्वारा जारी की गई पहली सूची में विपक्षी दलों के प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रारंभिक सूची में शामिल कुल तैंतीस तहसीलों में से अट्ठाइस तहसीलें सीधे तौर पर राज्य के मंत्रियों से जुड़ी हुई हैं। विपक्षी विधायकों के इलाकों में सूखे के हालात का जायजा लेने के लिए एक भी मंत्री ने दौरा तक नहीं किया है। किसानों को आपदा के वक्त मिलने वाली राहत सामग्री और सहायता के वितरण में इस तरह की पक्षपातपूर्ण राजनीति करना बेहद शर्मनाक है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के दौरान राजनीतिक विचारों और दूरियों को पूरी तरह अलग रखना चाहिए ताकि हर जरूरतमंद किसान तक समय पर मदद पहुंच सके। वडेट्टीवार ने चंद्रपुर जिले की ब्रह्मपुरी तहसील को भी तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की पुरजोर मांग उठाई है क्योंकि वहां के स्थानीय हालात काफी गंभीर बने हुए हैं।

मतदाता सूची और एसआईआर अभियान पर विवाद

सूखा राहत सूची के अलावा विपक्षी दल ने मतदाता पुनरीक्षण अभियान और एसआईआर प्रक्रिया की समयसीमा पर भी सवालिया निशान खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोकलिंगम को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि इस अभियान के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए दी गई बारह अक्टूबर की समय सीमा बेहद अपर्याप्त है। बीस सितंबर को कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में मुलाकात भी की थी लेकिन चुनाव आयोग ने केवल बारह दिनों का ही अतिरिक्त समय प्रदान किया है। एक करोड़ चौवन लाख मतदाताओं और चालीस लाख नए युवाओं में से मात्र तीन लाख नब्बे हजार लोगों ने ही फॉर्म नंबर छह भरा है। फॉर्म में गलतियां सामने आने के बावजूद उनकी दोबारा छपाई नहीं कराई गई है जिसके कारण आम नागरिकों को नए फॉर्म प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रियाओं के दौरान लगातार सर्वर ठप होने की समस्याएं आ रही हैं। आधार और मोबाइल नंबर आपस में लिंक न होने के अलावा मराठी तथा अंग्रेजी नामों के वर्तनी अंतर के कारण भी लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

कांग्रेस की चेतावनी और आगे की कार्रवाई

सरकार के इन फैसलों और कार्यप्रणाली से नाराज होकर कांग्रेस पार्टी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विजय वडेट्टीवार ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो पार्टी सड़क पर उतरकर सरकार से तीखे सवाल पूछेगी। दूसरी तरफ हर्षवर्धन सपकाल ने बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर नोटिस दिए जाने और दस्तावेज जुटाए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब कर्मचारी दस्तावेजों के संग्रहण में व्यस्त हैं तो नए आवेदन कौन स्वीकार करेगा यह एक बड़ा असमंजस है। उन्होंने प्रतिदिन प्राप्त होने वाले फॉर्म नंबर छह सात और आठ की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त डुप्लीकेट नामों की छंटाई के लिए विशेष सॉफ्टवेयर होने के बावजूद प्रारूप सूची में लाखों दोहरे नाम छपे होने का गंभीर मामला उठाया गया है। एक लोकसभा क्षेत्र के पच्चीस हजार से अधिक ऐसे संदिग्ध नामों की सूची नागपुर के जिलाधिकारी को सौंपी जा चुकी है। कांग्रेस ने मांग की है कि इन सभी नामों की दोबारा गहन जांच की जाए और पुष्टि होने पर उन्हें तुरंत सूची से बाहर किया जाए ताकि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।

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