आज नई दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पांच प्रमुख विपक्षी दलों ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक साझा गठबंधन बनाने की घोषणा की है। इस गठबंधन का मुख्य एजेंडा विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय है। नेताओं ने कहा कि वे इन चुनावों में एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम (CMP) के साथ जनता के बीच जाएंगे। गठबंधन की समन्वय समिति का नेतृत्व एक अनुभवी नेता को सौंपा गया है जो सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति पर निर्णय लेंगे।
गठबंधन की रणनीतिक प्राथमिकताएं इस गठबंधन ने अपने घोषणापत्र में किसानों की कर्ज माफी और युवाओं के लिए विशेष आर्थिक सहायता का वादा किया है। नेताओं ने जोर देकर कहा कि उनकी प्राथमिकता संविधान के मूल्यों की रक्षा और देश की आर्थिक स्थिति को सुधारना है। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अभी भी कई दौर की बातचीत बाकी है, लेकिन पार्टी प्रमुखों ने दावा किया है कि वे मतभेदों को भुलाकर पूरी तरह एकजुट हैं। अगले कुछ दिनों में पूरे राज्य में बड़ी रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
सत्ताधारी दल की प्रतिक्रिया सत्ताधारी दल ने इस गठबंधन को 'सत्ता की भूख' करार दिया है और इसे पूरी तरह बेअसर बताया है। भाजपा के प्रवक्ताओं ने कहा कि यह गठबंधन केवल चुनाव तक सीमित रहेगा और इसमें वैचारिक समानता का अभाव है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन मुकाबला काफी दिलचस्प बना सकता है, क्योंकि अब वोट बैंक का ध्रुवीकरण अलग तरीके से होगा। अब जनता के फैसले पर ही निर्भर करेगा कि यह गठबंधन कितना सफल होता है। चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीखों का ऐलान जल्द ही करने के संकेत दिए हैं।