मध्य प्रदेश के रीवा संसदीय क्षेत्र से भाजपा के वरिष्ठ सांसद जनार्दन मिश्रा अपने बयानों के कारण अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। सोमवार को रीवा जिले के एक स्थानीय कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एथनॉल संयंत्रों और स्थानीय किसानों की आय को लेकर एक ऐसा भाषण दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अपने संबोधन में सांसद ने क्षेत्र में स्थापित होने वाले नए एथनॉल उद्योगों के कामकाज और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों और गन्ने की खेती करने वाले किसानों को मिलने वाले समर्थन मूल्य पर विस्तार से चर्चा की, जिसके बाद कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं।
विपक्ष का तीखा हमला और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
सांसद जनार्दन मिश्रा के इस भाषण के तुरंत बाद विपक्षी दलों ने इसे हाथों-हाथ लिया और सरकार पर हमलावर रुख अख्तियार कर लिया। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश स्तर के नेताओं ने रीवा में प्रेसवार्ता कर सांसद के बयानों को धरातल से कोसों दूर बताया और आरोप लगाया कि ज़मीनी स्तर पर किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि कागजों पर जितनी यूनिट्स स्थापित दिखाने का दावा किया जा रहा है, उतनी धरातल पर काम नहीं कर रही हैं। इस बीच, जिला प्रशासन ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि एथनॉल प्लांट से जुड़ी सभी स्वीकृतियां पारदर्शी तरीके से दी जा रही हैं और किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
किसान संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विंध्य क्षेत्र के किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ किसान संगठनों ने सांसद के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि एथनॉल उत्पादन से मक्का और गन्ने की खेती करने वाले किसानों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचेगा और रीवा जिला ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा। वहीं, कुछ अन्य किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि संयंत्रों के कारण जलस्तर और पर्यावरण पर कोई विपरीत प्रभाव पड़ा, तो एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। सांसद के इस बयान के बाद आने वाले दिनों में रीवा की राजनीति में तापमान और बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है।