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राजनीतिक हमला: जयराम ठाकुर का दावा, सुक्खू सरकार के कार्यकाल में चार दशक पीछे चला गया हिमाचल
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता जयराम ठाकुर ने मौजूदा सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश विकास के मामले में चार दशक पीछे धकेल दिया गया है।
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Ankit Yadav
18 सित 2026, 14:27
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता जयराम ठाकुर ने राज्य की वर्तमान कांग्रेस नीत सुक्खू सरकार के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने एक तीखे बयान में कहा है कि मौजूदा शासनकाल के दौरान पहाड़ी राज्य में विकास की गति पूरी तरह से थम चुकी है और प्रशासनिक व्यवस्था पटरी से उतर गई है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दल लगातार राज्य सरकार की नीतियों और आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठा रहे हैं। जयराम ठाकुर के अनुसार, वर्तमान सरकार के फैसलों की वजह से हिमाचल प्रदेश विकास के पैमानों पर करीब चालीस साल पीछे चला गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अर्थव्यवस्था और विकास कार्यों पर गंभीर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य में वित्तीय अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है और सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए मिलने वाले फंड का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है, जिससे नई परियोजनाएं शुरू होने से पहले ही बंद होने की कगार पर पहुंच जाती हैं। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान जिन कल्याणकारी और विकासोन्मुखी योजनाओं को आगे बढ़ाया गया था, उन्हें वर्तमान सरकार ने राजनीतिक द्वेष के चलते या तो रोक दिया है या फिर उनकी रफ्तार धीमी कर दी है। पहाड़ी इलाकों में सड़कों का निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और शिक्षा क्षेत्र में सुधार जैसे जरूरी काम बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
जनता के बीच बढ़ता असंतोष और राजनीतिक सरगर्मी
जयराम ठाकुर के इस बड़े हमले के बाद राज्य का राजनीतिक पारा काफी चढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर सरकार को घेरने की बड़ी रणनीति बना रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और राज्य पर लगातार बढ़ रहे कर्ज के बोझ जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर विपक्षी नेता लगातार आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। दूसरी ओर, राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में बीजेपी इस मुद्दे पर और भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन या आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर सकती है ताकि आम जनता के बीच सरकार की विफलताओं को प्रमुखता से उठाया जा सके।
सरकार की तरफ से पलटवार की संभावना
हालांकि अभी तक कांग्रेस सरकार या पार्टी के अधिकृत प्रवक्ताओं की तरफ से इस बयान पर कोई तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष जल्द ही पूर्व मुख्यमंत्री के इन आरोपों का करारा जवाब देगा। सुक्खू सरकार पहले भी अपने ऊपर लगने वाले वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों को खारिज करती रही है और पिछली भाजपा सरकार पर ही राज्य को भारी कर्ज के संकट में छोड़ने का ठीकरा फोड़ती आई है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में राज्य के दोनों प्रमुख दलों के बीच विकास के इस मुद्दे पर राजनीतिक खींचतान किस नए मुकाम पर पहुंचती है और इसका असर आम जनता के मिजाज पर क्या पड़ता है।