संसद के वर्तमान मानसून सत्र के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में जारी छात्र आंदोलनों, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों ने दोनों सदनों में सरकार के खिलाफ अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन किया। सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और वामपंथी दलों के सांसद हाथों में तख्तियां लेकर अध्यक्ष के आसन के समीप वेल में आ पहुंचे और नारेबाजी करने लगे। विपक्षी सांसदों की मांग थी कि भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और युवाओं के रोजगार के अधिकार पर स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) के तहत तुरंत संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए। हंगामा इतना बढ़ गया कि लोकसभा अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ हुई, तो सरकार ने भारी शोर-शराबे और विपक्ष के लगातार विरोध के बीच ही ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल 2026 और केरल नाम परिवर्तन विधेयक 2026 सहित चार महत्वपूर्ण विधायी विधेयकों को पटल पर रखा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि सरकार युवाओं और परीक्षाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर नियमबद्ध तरीके से चर्चा कराने के लिए पूरी तरह तैयार है और गृह मंत्री स्वयं इस पर विस्तृत वक्तव्य देंगे। हालांकि, विपक्षी सांसद लगातार नारों के साथ वेल में डटे रहे, जिसके कारण सदन में विधायी कार्य संचालित करना संभव नहीं हो सका और अध्यक्ष ने लोकसभा को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।
राज्यसभा में रणनीति और एफसीआरए बिल पर तकरार
दूसरी ओर, राज्यसभा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही बनी रही। सुबह की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं की एक उच्चस्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरकार को घेरने की संयुक्त रणनीति पर सहमति बनी। विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन (FCRA) संशोधन विधेयक का पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया।
कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार इस कानून के माध्यम से गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक संस्थानों को अनुचित रूप से निशाना बनाने का प्रयास कर रही है। ऊपरी सदन में भी तख्तियां दिखाने, नारेबाजी करने और वेल में प्रवेश करने के कारण पीठासीन अधिकारी को कई बार कार्यवाही रोकनी पड़ी। अंततः, शून्यकाल और प्रश्नकाल की कार्यवाही प्रभावित होने के बाद राज्यसभा को भी अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया। संसद में जारी इस गतिरोध के कारण कई अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नीतिगत मुद्दों पर चर्चा लटक गई है।