भारतीय संसद के मानसून सत्र में देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और धांधली रोकने के उद्देश्य से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया गया है। इस नए कानून में परीक्षा लीक करने वाले गिरोहों और संगठित अपराध में शामिल तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। संसद में चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने विधेयक पर अपने विचार व्यक्त किए और इसे केवल सजा देने वाला कानून बताने के बजाय परीक्षा प्रणाली में तकनीकी बदलाव लाने की सलाह भी दी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
इसी बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अदालत में 13 मुख्य आरोपियों के खिलाफ अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी के अनुसार इस रैकेट में शामिल मास्टरमाइंड्स ने कई राज्यों में परीक्षा केंद्रों और गोपनीय प्रिंटिंग प्रेस के सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर प्रश्नपत्र हासिल किए थे। सीबीआई की इस चार्जशीट में वित्तीय लेन-देन, बिचौलियों की भूमिका और डिजिटल सबूतों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है।
एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच के लिए आगे की पूरक चार्जशीट जल्द पेश की जाएगी। विधेयक के पारित होने और सीबीआई की कार्रवाई के बाद देशभर के प्रतियोगी छात्रों और छात्र संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। छात्र नेताओं का कहना है कि कठोर दंड के प्रावधानों के साथ-साथ परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी तकनीक अपनाई जानी चाहिए। शिक्षा मंत्रालय ने भी घोषणा की है कि आगामी सभी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संचालन के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की गई है जो परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए काम करेगी।