भारतीय राजनीति और संवैधानिक ढांचे के लिहाज से एक बड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत संसद में 131वां संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक 2026 प्रस्तुत कर दिया गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य आगामी वर्षों में देश की जनसंख्या के ताजा आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना है। प्रस्तावित कानून के अनुसार, लोकसभा की अधिकतम सीटों की क्षमता को मौजूदा 550 से बढ़ाकर 850 तक करने का कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक राज्य में आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
संसद में पेश विधेयक के प्रावधानों के तहत एक उच्चस्तरीय परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व या वर्तमान न्यायाधीश करेंगे। आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और संबंधित राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त सदस्य के रूप में शामिल होंगे। नए परिसीमन की प्रक्रिया के लागू होने से लोकसभा में राज्यों के सीटों का अनुपात बदलेगा। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिपरिषद की अधिकतम सीमा में भी आनुपातिक बदलाव की संभावना जताई जा रही है, जिस पर संसद में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही है।
विपक्षी दलों ने इस विधेयक के कई प्रावधानों पर अपनी चिंताएं जताई हैं। दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक दलों का तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण नीतियों का सफलतापूर्वक पालन किया है, उन्हें सीटों के पुनर्गठन में किसी प्रकार का राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और सभी हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद ही पूरी की जाएगी। इस विधेयक पर संसदीय समिति में भी विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है।