मुख्यमंत्री कार्यालय और सहयोगियों पर जांच एजेंसी की दबिश
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के आधिकारिक कैंप कार्यालय और उनके ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े कई स्थानों पर औचक तलाशी अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए हैं जिनकी गहन समीक्षा की जा रही है। यह तलाशी अभियान पंजाब और चंडीगढ़ के आठ विभिन्न ठिकानों पर एक साथ अंजाम दिया गया। सीबीआई के अनुसार, राजबीर सिंह घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक पदों पर तैनाती, टेंडर आवंटन, नीतिगत फैसलों और जमीन विवाद जैसे संवेदनशील मामलों में अवैध रूप से आर्थिक लाभ उठाया है। मुख्यमंत्री ने संगरूर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उनके सहयोगियों के ठिकानों पर कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है और अधिकारी बिना किसी ठोस उपलब्धि के वापस लौट गए। उन्होंने इसे सरकार को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश बताया है।
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप और सरकार का स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस सीबीआई कार्रवाई को सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की कार्यप्रणाली हमेशा से ऐसी रही है कि चुनावों के करीब आते ही केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को डराने के लिए किया जाता है। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि यदि उनकी सरकार ने कोई भी गलत कार्य नहीं किया है, तो उन्हें किसी भी जांच से डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दिल्ली, पश्चिम बंगाल और हरियाणा का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां भी इसी प्रकार के हथकंडे अपनाए गए थे। भगवंत मान का कहना है कि उनके ओएसडी के पैतृक गांव के लोग भी उनके समर्थन में मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग केवल राजनीतिक द्वेष के कारण किया जा रहा है ताकि पंजाब की जनता का ध्यान भटकाया जा सके। हालांकि, सीबीआई ने अपनी कार्रवाई को पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया बताते हुए कहा है कि यह तलाशी अभियान अदालत द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों और दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ही संपन्न किया गया है।
कानूनी प्रक्रिया और मामले की पृष्ठभूमि
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक जांच से हुई थी, जिसने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। मामला आगे बढ़ते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा, जिसने 5 अक्टूबर को सीबीआई को जांच सौंपने और मामला दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने पंजाब पुलिस द्वारा की गई पूर्ववर्ती कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे और सीबीआई को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करे। हाईकोर्ट के इन आदेशों के जवाब में पंजाब सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस कानूनी खींचतान के बीच सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी दर्ज करने के अगले ही दिन छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। यह स्पष्ट है कि इस मामले में प्रशासनिक और न्यायिक हस्तक्षेप के बाद राजनीति गरमा गई है। आने वाले समय में अदालती फैसलों और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से इस मामले की दिशा तय होगी, जो राज्य के आगामी राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।