संगठन में बदलाव और सीट बंटवारे पर तकरार
उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तालमेल बैठने में मुश्किलें आ रही हैं। इसी राजनीतिक परिस्थिति के चलते कांग्रेस पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया। उनकी जगह अराधना मिश्रा को प्रदेश की कमान सौंपी गई है और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इन बदलावों के बाद कांग्रेस नेताओं ने अपनी रणनीति खुलकर रखनी शुरू कर दी है। इमरान मसूद ने एक विशेष बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में कांग्रेस किसी भी स्थिति में भिखारी नहीं है बल्कि वह एक सच्ची सहयोगी है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि अक्टूबर महीने तक दोनों दलों के बीच सीटों का अंतिम फैसला नहीं होता है तो इससे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस पार्टी ने अपनी ओर से यह मांग रखी है कि उन्हें आगामी चुनाव में 150 से ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए। पार्टी का तर्क है कि वे किसी भी समझौते के तहत अपनी ताकत कम नहीं आंकेंगे और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
जीत के दावों पर पलटवार और राजनीतिक परसेप्शन
समाजवादी पार्टी की ओर से जिताऊ फैक्टर वाले बयानों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनावी मैदान में कोई भी व्यक्ति या दल जीत की सौ फीसदी गारंटी नहीं दे सकता है। यदि कोई दल कांग्रेस को स्वीकार करने से मना करेगा तो पार्टी अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए पूरी ताकत से लड़ेगी। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इस बार की चुनावी परिस्थितियां वर्ष 2017 जैसी नहीं हैं और दोनों चुनावों में बहुत बड़ा अंतर है। पिछली बार की राजनीतिक स्थिति से वर्तमान समय की तुलना करना पूरी तरह से बेमानी है। देश भर में इस समय राहुल गांधी के पक्ष में एक मजबूत राजनीतिक माहौल बना हुआ है। कांग्रेस के पिछले चुनावों में खराब प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि राजनीति पूरी तरह से परसेप्शन का खेल होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने महज 2 सीटों से सफर शुरू करके बहुत आगे का मुकाम हासिल किया और शून्य से 67 सीटों तक का सफर तय किया, वैसे ही स्थितियां बदलती हैं। कांग्रेस एक राष्ट्रव्यापी पार्टी है और राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।
पुराने आंकड़ों का हवाला और सरकार बनाने का लक्ष्य
कांग्रेस नेताओं ने अपनी पुरानी सफलताओं और आंकड़ों का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी के साथ हुए पिछले गठबंधनों का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी की सरकार होने के बावजूद उन्हें सिर्फ 5 सीटें मिली थीं। इसके बाद वर्ष 2019 में जब बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का गठबंधन हुआ था, तब भी समाजवादी पार्टी ने केवल 5 सीटें ही जीती थीं। इसके विपरीत वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पूरे देश में भारत जोड़ो यात्रा की एक बड़ी झलक दिखाई दी थी। आंकड़ों की बात करें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को जो ज्यादा सीटें मिली थीं, उसके पीछे मुख्य वजह कांग्रेस का समर्थन था। उस चुनाव में कांग्रेस ने अपने हिस्से से बड़ा दिल दिखाते हुए चुनाव लड़ा था और कुल 6 सीटें जीती थीं। पूरे देश में राहुल गांधी के नाम और नेतृत्व पर 2024 का चुनाव लड़ा गया था। अब कांग्रेस पार्टी का मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश में अपने दम पर मजबूती के साथ चुनाव लड़ना और राज्य में अपनी सरकार बनाना है।