शनिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर दाखिल किया नामांकन
वाराणसी और गाजीपुर क्षेत्र में होने वाले स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव के लिए प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल काफी तेज हो चुकी है। इसी क्रम में शनिवार को दोपहर के समय गाजीपुर जिले के मूल निवासी चंद्रजीत सिंह यादव ने अपने राजनीतिक सफर का एक नया कदम आगे बढ़ाया। उन्होंने वाराणसी और गाजीपुर के इस महत्वपूर्ण चुनाव के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना औपचारिक नामांकन दाखिल कर दिया है। नामांकन की इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वे अपने गृह जिले और क्षेत्र के तमाम उत्साही समर्थकों के साथ सीधे कचहरी परिसर पहुंचे थे। उनके इस कदम से स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं और चुनावी समीकरणों पर भी लोगों की नजरें टिकने लगी हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में पर्चा दाखिल करने के दौरान उनके साथ आए हुए लोगों में काफी उत्साह देखा गया और सभी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
समर्थकों की भीड़ के साथ कचहरी पहुंचे चंद्रजीत यादव
शनिवार को जब चंद्रजीत सिंह यादव अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए कचहरी परिसर की तरफ बढ़ रहे थे, तब उनके साथ समर्थकों का एक बड़ा काफिला मौजूद था। कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले उनके समर्थकों ने उन्हें फूलों की बड़ी-बड़ी मालाएं पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया और उनके पक्ष में नारे भी लगाए। इस दौरान कचहरी के रास्ते में ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ उनका पूरा काफिला आगे बढ़ा जिससे वहां का माहौल पूरी तरह से चुनावी रंग में रंग गया। अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करने के बाद उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को भी जनता और मीडिया के सामने पूरी तरह स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग में उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान कई उच्च पदों पर जिम्मेदारी के साथ काम किया है। अपने प्रशासनिक और कार्यगत अनुभव के आधार पर वे इस चुनाव के मैदान में उतरे हैं ताकि क्षेत्र के लोगों और विशेषकर युवाओं के लिए ठोस प्रयास किए जा सकें। उनके इस तरह से शक्ति प्रदर्शन के साथ पर्चा दाखिल करने से क्षेत्र के अन्य प्रत्याशियों के बीच भी हलचल देखी जा रही है।
शिक्षा, शिक्षक और युवाओं के अधिकारों पर रहेगा मुख्य जोर
चुनाव मैदान में उतरने के पीछे अपने मुख्य मुद्दों और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए चंद्रजीत सिंह यादव ने बताया कि उनके प्रचार का मुख्य केंद्र बिंदु शिक्षा, शिक्षक और नौजवानों के अधिकार होंगे। उन्होंने पुरजोर शब्दों में मांग उठाई कि राज्य के वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को हर हाल में एक सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल किए जाने की जोरदार वकालत की ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। नौजवानों के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। जब तक शिक्षित और योग्य नौजवानों को स्थाई रोजगार नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए ताकि वे आर्थिक रूप से संबल बन सकें। इन तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर वे मतदाताओं के बीच जा रहे हैं और अपने पक्ष में समर्थन की अपील कर रहे हैं ताकि चुनाव जीतने के बाद इन सभी विषयों पर प्रभावी रूप से कार्य किया जा सके।