नूंह रैली को लेकर दीपेंद्र हुड्डा का तीखा हमला हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में उस समय सरगर्मी काफी बढ़ गई जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने इनेलो के प्रमुख नेता अभय सिंह चौटाला पर एक सार्वजनिक मंच से बेहद तीखा तंज कसा। हाल ही में आयोजित की गई नूंह रैली और अन्य राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में चर्चा करते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने सीधे तौर पर अभय चौटाला की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और उन्हें अपने गृह क्षेत्र तथा विधानसभा क्षेत्र के प्रति अधिक जवाबदेह होने की सलाह दी। उन्होंने तंज कसते हुए यह कहा कि चौटाला को अपनी राजनीति चमकाने के लिए अन्य क्षेत्रों में बेवजह हस्तक्षेप करने के बजाय पहले पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से आवश्यक सहमति या इजाजत लेनी चाहिए और उसके बाद पूरी तरह से ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के विकास और वहां की स्थानीय समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए जहां की जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर भेजा है और जो लगातार अपने बुनियादी अधिकारों तथा विकास कार्यों के लिए उनकी ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है।
हरियाणा के सियासी मैदान में बढ़ती जुबानी जंग भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय पार्टियों के बीच आपसी खींचतान कोई नई बात नहीं है परंतु हरियाणा के परिदृश्य में यह घमासान लगातार नए आयाम ले रहा है जहां विभिन्न दलों के नेता एक दूसरे को नीचा दिखाने या सियासी बढ़त हासिल करने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देते हैं। जब भी राज्य के किसी भी हिस्से में कोई बड़ी रैली या जनसभा का आयोजन होता है, तो विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होना पूरी तरह से तय माना जाता है। नूंह और उसके आसपास के क्षेत्रों में हालिया राजनीतिक गतिविधियों के कारण समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और सभी प्रमुख दल आगामी रणनीतियों को धार देने में जुटे हुए हैं। इस तरह के बयानों से न केवल राजनीतिक तापमान में भारी उछाल आता है बल्कि जनता के बीच भी तीखी चर्चाओं का बाजार गर्म हो जाता है क्योंकि हर एक दल अपने पाले में समर्थन जुटाने के लिए विरोधी खेमे की कमजोरियों पर लगातार प्रहार करने की रणनीति पर काम कर रहा है और मीडिया के माध्यम से जनता तक अपने विचार पहुंचाने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहा है।
स्थानीय राजनीति पर असर और आगामी रणनीतिक कदम इस प्रकार के बयानों और राजनीतिक कटाक्षों का दूरगामी प्रभाव राज्य के स्थानीय चुनावों और आगामी विधानसभा सत्रों पर पड़ना पूरी तरह से तय माना जा रहा है क्योंकि हर एक नेता अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है। ऐलनाबाद जैसे महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों में जनता अब अपने जनप्रतिनिधियों से विकास कार्यों का पूरा हिसाब-किताब मांगने लगी है और केवल जुबानी बहसों से उनका संतोष होना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों ही दलों के बीच यह आपसी रस्साकसी और अधिक तीव्र हो सकती है क्योंकि सभी दल राज्य की सत्ता समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। जनता इन सभी बयानों को बहुत गौर से देख रही है और समय आने पर अपनी प्रतिक्रिया लोकतांत्रिक माध्यमों से दर्ज कराने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठी है जिससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाला राजनीतिक समय काफी दिलचस्प और संघर्षपूर्ण रहने वाला है।