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राजनीति

वंदे मातरम पर सियासी घमासान: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के आचरण पर उठाए तीखे सवाल

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर नया तूफान खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस पार्टी पर कड़ा हमला बोला है।

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Kantap News डेस्क
16 अग 2026, 17:07
वंदे मातरम पर सियासी घमासान: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के आचरण पर उठाए तीखे सवाल
देश में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सम्मान और उसके गायन के दौरान विपक्षी नेताओं के बर्ताव को लेकर राजनीति बेहद गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस मुद्दे पर मुखर होकर कांग्रेस पार्टी की कड़ी आलोचना की है और उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री का कहना है कि जब भी देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावनाओं का सम्मान करने का अवसर आता है, तब कांग्रेस के नेता हमेशा असहज महसूस करते हैं। यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश अपनी स्वतंत्रता की वर्षगांठ मना रहा है, और ऐसे में इस तरह की घटनाओं का होना राष्ट्रीय संस्कृति से जुड़े मुद्दों को फिर से केंद्र में ले आया है।

सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान

प्रह्लाद जोशी ने आगे कहा कि हमारे राष्ट्रीय प्रतीकों और गीतों का अपमान करना या उनके प्रति उदासीनता दिखाना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वंदे मातरम वह पवित्र मंत्र है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनगिनत सेनानियों में देश के लिए जान कुर्बान करने का जज्बा पैदा किया था। आज के दौर में भी यदि राजनीतिक कारणों से ऐसे महत्वपूर्ण प्रतीकों से दूरी बनाई जाती है, तो यह देश की महान विरासत के साथ एक प्रकार का अन्याय है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है और दोनों पक्षों के नेता अपने-अपने तर्कों के साथ एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।

विवाद के राजनीतिक मायने

इस ताजा राजनीतिक टकराव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश में वैचारिक और सांस्कृतिक मुद्दे कितने संवेदनशील हैं। आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस तरह के विवादों का तूल पकड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि हर दल अपनी वैचारिक जमीन को मजबूत करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता। आम जनता के बीच भी इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या राष्ट्रीय पर्वों और गीतों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी घमासान किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका चुनावी मैदान पर क्या असर पड़ता है।
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