विजयादशमी पर मुख्यमंत्री का महत्वपूर्ण आह्वान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने लोगों से विजयादशमी के इस पावन और महत्वपूर्ण पर्व पर अपने भीतर के रावण पर पूरी तरह से काबू पाने का स्पष्ट आग्रह किया है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है जिसे पूरे देश में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता को बधाई दी और समाज में सकारात्मकता बनाए रखने की बात कही। हर साल इस दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि अंततः सत्य और धर्म की ही जीत होती है। मुख्यमंत्री ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लोगों को आत्ममुग्धता और अहंकार को त्यागने का संदेश दिया है। उनका यह बयान विजयादशमी के दिन सामने आया है जब लोग अपने घरों और मेलों में उत्सव मना रहे हैं। इस प्रकार के संदेश समाज में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का काम करते हैं और लोगों को अपने भीतर झांकने का अवसर प्रदान करते हैं।
सद्भाव और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने की अपील
मुख्यमंत्री धामी ने अपने इस संदेश के माध्यम से समाज में आपसी सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया है। किसी भी त्योहार का मुख्य उद्देश्य लोगों को आपस में जोड़ना और समाज में शांति स्थापित करना होता है। उन्होंने कहा कि हमें मिलजुलकर ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहिए जिससे समाज का हर वर्ग सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। त्योहारों का यह समय आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक नई शुरुआत करने का सबसे बेहतरीन अवसर होता है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में भी नैतिकता और सच्चाई के मार्ग का पालन करें। जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने अंदर की बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेता है तो पूरा प्रदेश स्वतः ही प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ने लगता है। इस तरह के आयोजनों से सांस्कृतिक एकता मजबूत होती है और हमारी पुरानी परंपराएं भी जीवित रहती हैं जिन्हें आने वाली पीढ़ियां भी सीखती हैं। जनता ने भी इस संदेश का स्वागत किया है और त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने का संकल्प लिया है।
त्योहारों की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और इसका महत्व
भारत में विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य की विजय और धर्म की स्थापना के रूप में बहुत प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। इस दिन लोग बुराई के प्रतीक बने रावण का पुतला फूंकते हैं और भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री स्तर से जब ऐसे संदेश जनता के बीच आते हैं तो उनका प्रभाव और भी अधिक गहरा हो जाता है जिससे लोगों को प्रेरणा मिलती है। आधुनिक समय में समाज को जोड़ने और मानवीय मूल्यों को पुनर्जीवित करने के लिए ऐसे पर्वों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है इसलिए हमेशा अच्छे कर्मों का ही चुनाव करना चाहिए। उत्तराखंड राज्य में इस पर्व को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिलता है और विभिन्न स्थानों पर मेलों का आयोजन किया जाता है। प्रशासन और सरकार की ओर से भी सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं ताकि सभी लोग बिना किसी बाधा के त्योहार का आनंद ले सकें।