गोरखनाथ मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रविवार से शुरू होने वाला चार दिवसीय दौरा पूरी तरह से आध्यात्मिक गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा। गोरखनाथ मंदिर में नवरात्र की अष्टमी तिथि के अवसर पर रविवार की शाम को निशा पूजा और हवन के साथ विशेष अनुष्ठान की शुरुआत की जाएगी। इस दौरान मंदिर के मुख्य पुजारी योगी कमलनाथ के दिशा-निर्देशन में विधिवत पूजा-पाठ का आयोजन होगा। मंदिर के शक्तिपीठ में पूर्व में की गई कलश स्थापना के बाद से ही नियमित पूजा का क्रम जारी है, जिसे मुख्यमंत्री अपनी उपस्थिति से और अधिक भव्य बनाएंगे। सोमवार की सुबह 11 बजे के निर्धारित समय पर कन्या पूजन का आयोजन होगा। इस अनुष्ठान के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं नौ कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर उनके चरण पखारेंगे और तिलक लगाएंगे। कन्याओं के माथे पर दही, अक्षत और चंदन का तिलक लगाकर उन्हें भोजन कराया जाएगा। इसके बाद उपहार और दक्षिणा प्रदान कर आशीर्वाद लेने की परंपरा पूरी की जाएगी और बटुक पूजन भी संपन्न होगा।
विजयादशमी शोभायात्रा और राजतिलक समारोह
मंगलवार को दशहरे के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरक्षनाथ की विशेष पूजा अर्चना का आयोजन किया जाएगा। इस दिन शाम के समय मंदिर परिसर से भव्य विजयादशमी शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसकी अगुवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। शोभायात्रा में वाद्य यंत्रों, जैसे तुरही और नगाड़ों की ध्वनि के साथ बैंड-बाजे शामिल होंगे, जो वातावरण को भक्तिमय बना देंगे। यह यात्रा मंदिर से शुरू होकर मानसरोवर मंदिर तक जाएगी, जहाँ मुख्यमंत्री भगवान शिव की पूजा करेंगे। इसके उपरांत यात्रा मानसरोवर स्थित रामलीला मैदान में प्रवेश करेगी। वहां मुख्यमंत्री रामलीला मंच पर पहुंचकर भगवान राम का राजतिलक करेंगे। साथ ही वे श्रद्धा के साथ राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान जी की पूजा करते हुए आरती भी उतारेंगे। इस दौरान गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक तिलकोत्सव का आयोजन भी होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। मुख्यमंत्री इस अवसर पर मंदिर में मौजूद सभी भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करेंगे।
शोभायात्रा का सामाजिक महत्व और समन्वय
गोरखनाथ मंदिर की विजयादशमी शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का बड़ा प्रतीक मानी जाती है। इसमें समाज के हर वर्ग के लोग उत्साह के साथ हिस्सा लेते हैं। विशेष रूप से बुनकर समाज और मुस्लिम समुदाय के नागरिक भी इस यात्रा का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं। उदाहरण स्वरूप, उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के पूर्व अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा का परिवार पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय यानी तीन पीढ़ियों से इस शोभायात्रा का स्वागत करने की परंपरा निभाता आ रहा है। यह आयोजन सांप्रदायिक सद्भाव का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। दशहरे के दिन मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले भोज में भी समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को सम्मिलित होने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होने वाले ये सभी कार्यक्रम परंपराओं के पालन और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाले हैं। मंदिर में की जाने वाली यह निरंतर पूजा और दशहरे की ये गतिविधियां स्थानीय स्तर पर काफी महत्व रखती हैं।