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आर्थिक साझेदारी: भारत और बेल्जियम ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने पर सहमति जताई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर से मुलाकात की, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार को अगले पांच वर्षों में दोगुना करने का बड़ा समझौता हुआ है।
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Ankit Yadav
04 सित 2026, 16:00
भारतीय कूटनीति और वैश्विक व्यापारिक संबंधों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारत और बेल्जियम ने आने वाले पांच वर्षों के भीतर अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का ऐतिहासिक संकल्प लिया है। इस महत्वपूर्ण रणनीतिक सहमति पर पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। यह बैठक दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में नए रास्ते खोलने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
व्यापार और कूटनीतिक सहयोग
नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच यह उच्च स्तरीय संवाद ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। प्रधानमंत्री मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की इस मुलाकात के दौरान दोनों राष्ट्रों के शीर्ष अधिकारियों ने वाणिज्यिक आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग, और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों पक्षों ने माना कि भारत और बेल्जियम के बीच आपसी व्यापार की अपार संभावनाएं हैं, जिनका अभी पूरी तरह से दोहन नहीं किया जा सका है। इसी को ध्यान में रखते हुए अगले पांच वर्षों में व्यापारिक आंकड़ों को दोगुना करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
इस व्यापक साझेदारी के तहत कृषि, प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। बेल्जियम यूरोपीय संघ के भीतर भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है, और यह नया समझौता दोनों देशों की कंपनियों के लिए निवेश के नए अवसर पैदा करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान दोनों देशों के निजी क्षेत्रों के बीच आपसी जुड़ाव को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को भी वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल सके।
भविष्य की रूपरेखा और उम्मीदें
इस उच्च स्तरीय वार्ता के परिणामों से दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से न केवल निर्यात और आयात के आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि दोनों देशों के बीच तकनीकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहन मिलेगा। आने वाले महीनों में दोनों देशों के संबंधित मंत्रालय इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक रोडमैप तैयार करेंगे, जिसके तहत नियमों को सरल बनाने और व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर काम किया जाएगा। यह समझौता वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक साख और मजबूत होती अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का एक और स्पष्ट प्रमाण है।