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बड़ा व्यापार लक्ष्य: पीयूष गोयल ने भारत-रूस वार्ता में सौ अरब डॉलर का लक्ष्य तय किया
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-रूस व्यापार संवाद के दौरान एक बड़ा आर्थिक लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी वाणिज्यिक गतिविधियों को तेजी से बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
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Ankit Yadav
11 सित 2026, 11:25
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को मजबूत करने और द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के उद्देश्य से आयोजित भारत-रूस बिजनेस डायलॉग 2026 में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक अहम घोषणा की है। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच आपसी व्यापारिक आदान-प्रदान को आने वाले समय में एक सौ अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। उनका यह बयान दोनों देशों की सरकारों के बीच मजबूत होती आर्थिक साझेदारी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
गैर-ऊर्जा क्षेत्रों पर विशेष जोर
इस महत्वपूर्ण मंच पर चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा केवल पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। वर्तमान में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों का बड़ा हिस्सा द्विपक्षीय व्यापार का केंद्र रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि अन्य क्षेत्रों में भी संभावनाओं को तलाशा जाए। पीयूष गोयल ने आह्वान किया कि गैर-ऊर्जा क्षेत्रों में व्यापारिक सहयोग को बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों के उद्यमियों और निवेशकों को आगे आना चाहिए, जिससे अर्थव्यवस्था के विभिन्न मोर्चों पर विविधीकरण सुनिश्चित किया जा सके।
व्यापारिक संवाद के दौरान विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, कृषि और फार्मास्यूटिकल्स जैसे कई उभरते हुए क्षेत्रों पर भी गंभीर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने माना कि दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के पास एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने की असीम क्षमता मौजूद है। इस दिशा में सप्लाई चेन को और अधिक सुगम बनाने तथा बाधाओं को दूर करने के लिए साझा रणनीतियों पर काम करने की सहमति भी बनी है, ताकि छोटे और मध्यम उद्योगों को भी इस वैश्विक व्यापारिक विस्तार का सीधा लाभ मिल सके।
लखनऊ और अन्य व्यावसायिक केंद्रों की भूमिका
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित देश के अन्य प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र भी इस प्रकार की अंतर्राष्ट्रीय पहलों से मिलने वाले अवसरों को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। स्थानीय स्तर पर एमएसएमई और विनिर्माण इकाइयों को इस व्यापक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार रणनीति का हिस्सा बनाने के लिए राज्य स्तर पर भी विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गैर-ऊर्जा व्यापार में यह वृद्धि लक्ष्य के अनुरूप हासिल होती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव देश के विभिन्न राज्यों के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
आगामी महीनों में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दोनों देशों के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के बीच नियमित बैठकों और समझौतों का दौर जारी रहने की पूरी उम्मीद है। निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए नियामक प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, यह पहल भारत और रूस के बीच आर्थिक कूटनीति के एक नए और अधिक समावेशी अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।