शी जिनपिंग के दौरे की चीन पुष्टि क्यों नहीं कर रहा, क्या भारत ने अपनी अहम मांग छोड़ दी
भारत-रूस के बीच Su-57 फाइटर जेट डील संभव: पुतिन BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे; 2016 की गोवा समिट में S-40...
अपना ही 'उसूल' भूलीं मायावती, BSP में बढ़ी बहनजी की वंशबेल; अब छोटे भतीजे को भी कराई एंट्री
हूती विद्रोहियों ने रेड सी में मोखा पोर्ट पर किया क़ब्ज़ा- रिपोर्ट, सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका
BRICS Summit: भारत आएंगे पेजेश्कियन तो एयरस्पेस में कितना खतरा? रूस-चीन से ज्यादा ईरान के प्लेन पर नजर
500 छात्र लापता, 31 टीचरों का नहीं मिल रहा सुराग... नेपाल बाढ़ के बाद स्कूलों में पसरा सन्नाटा
BRICS समिट पर कांग्रेस में मतभेद: चिदंबरम ने पूछा- देश को क्या मिला; थरूर बोले- 11 देश के नेताओं को एक मंच ...
चलती मुंबई लोकल से गिरी महिला, खचाखच भरी ट्रेन का वीडियो देख सुरक्षा उठे पर सवाल
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
मशरूम उद्योग में विकास: भारत वैश्विक स्तर पर चौथे पायदान पर पहुंचा
भारत ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक मंच पर चौथा स्थान प्राप्त कर लिया है, हालांकि अब इसका मुख्य ध्यान उत्पादों की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने और विपणन प्रणालियों को अधिक मजबूत करने पर केंद्रित हो गया है।
A
Ankit Yadav
11 सित 2026, 13:37
कृषि और बागवानी के क्षेत्र में निरंतर प्रगति करते हुए भारत ने मशरूम उत्पादन के मामले में दुनिया भर में अपनी एक मजबूत स्थिति बना ली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश अब वैश्विक स्तर पर चौथे पायदान पर काबिज हो चुका है, जो यहां के किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत को दर्शाता है। इस सफलता के बाद भी देश के कृषि विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का पूरा ध्यान अब इस बात पर है कि उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कैसे ढाला जाए।
विपणन और शेल्फ-लाइफ पर विशेष फोकस
उत्पादन के मोर्चे पर मिली इस बड़ी सफलता के बाद अब उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पाद की शेल्फ-लाइफ यानी उसकी ताजगी को लंबे समय तक बनाए रखने की है। चूंकि मशरूम एक बेहद नाजुक खाद्य पदार्थ है, इसलिए इसे लंबी दूरी तक सुरक्षित भेजने और बाजारों में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसके साथ ही, बेहतर विपणन रणनीतियों और कोल्ड चेन नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी पहुंच आसान हो सके।
पारंपरिक कृषि पद्धतियों से हटकर अब किसान वैज्ञानिक तरीकों से मशरूम की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों और विशेषकर लखनऊ के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी मशरूम की खेती के प्रति किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है, जिससे स्थानीय आर्थिकी को भी एक नया बल मिल रहा है। हालांकि, प्रशिक्षण और उन्नत बीज की उपलब्धता जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना अभी भी एक प्राथमिकता बनी हुई है ताकि छोटे किसान भी इस बढ़ते बाजार का पूरा लाभ उठा सकें और अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकें।
भविष्य की योजनाओं के तहत सरकार और विभिन्न कृषि संस्थान मिलकर किसानों को आधुनिक पैकेजिंग, प्रोसेसिंग यूनिट्स और वैल्यू एडिशन की ट्रेनिंग देने की दिशा में काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शेल्फ-लाइफ से जुड़ी तकनीकी बाधाओं को सफलतापूर्वक पार कर लिया जाए, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक मशरूम बाजार में और भी ऊपर यानी शीर्ष तीन देशों में अपनी जगह बना सकता है। इसके लिए निरंतर अनुसंधान और बाजार आधारित नीतियों का होना बेहद आवश्यक है, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को समान रूप से फायदा पहुंच सके।