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बुंदेलखंड में बड़ा रक्षा निवेश: चित्रकूट में 600 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण इकाई स्थापित करेगी बीईएल (BEL)
उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) चित्रकूट में 600 करोड़ रुपये की नई रक्षा निर्माण इकाई लगाने जा रहा है।
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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 18:12
उत्तर प्रदेश के पिछड़े माने जाने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र की किस्मत अब रक्षा विनिर्माण (Defense Manufacturing) के जरिए बदलने जा रही है। भारत सरकार की नवरत्न रक्षा पीएसयू कंपनी 'भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड' (BEL) ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UP DIC) के चित्रकूट नोड में अपनी एक नई और अत्याधुनिक रक्षा उपकरण निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए यूपी एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के साथ औपचारिक भूमि आवंटन समझौता किया है। बीईएल इस नई विनिर्माण इकाई की स्थापना पर लगभग 600 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष पूंजीगत निवेश करेगी। इस संयंत्र में भारतीय सशस्त्र बलों के लिए आधुनिक रडार प्रणालियां, नाइट-विज़न उपकरण, और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सामग्री तैयार की जाएगी।
चित्रकूट नोड का कायाकल्प और हजार से अधिक रोजगार
यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार, चित्रकूट नोड में बीईएल को लगभग 100 एकड़ से अधिक विकसित औद्योगिक भूमि आवंटित कर दी गई है। संयंत्र का निर्माण कार्य चालू वर्ष के भीतर शुरू हो जाएगा और अगले दो वर्षों के भीतर इसमें उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इस रक्षा प्रोजेक्ट के शुरू होने से चित्रकूट, बांदा और आसपास के बुंदेलखंडीय जनपदों के 1,500 से अधिक स्थानीय युवाओं को सीधे तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही, कई छोटी-मोटी सहायक एमएसएमई (MSME) इकाइयां भी इस बड़े प्रोजेक्ट के इर्द-गिर्द विकसित होंगी, जिससे स्थानीय व्यापार को बल मिलेगा।
आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और बुंदेलखंड का विकास
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस निवेश का स्वागत करते हुए कहा कि कभी बीहड़ और पानी की किल्लत के लिए जाना जाने वाला बुंदेलखंड अब देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाला बड़ा औद्योगिक हब बन रहा है। डिफेंस कॉरिडोर के छह नोड्स (झांसी, चित्रकूट, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा) में बड़े पैमाने पर वैश्विक और राष्ट्रीय रक्षा कंपनियां अपनी इकाइयां लगा रही हैं। बीईएल द्वारा चित्रकूट में इस अत्याधुनिक इकाई के स्थापित होने से भारत की विदेशी रक्षा आयातों पर निर्भरता कम होगी और 'मेक इन इंडिया-मेक फॉर द वर्ल्ड' के सपने को नई ताकत मिलेगी।