कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
अरुणाचल में चीनी सैनिकों से अब भी तनातनी! ITBP चीफ बोले- हमारे शौर्य कमांडो तैयार      Bihar MLC Election 2026 Live: चुनाव के बीच STF की बड़ी कार्रवाई, JDU से निष्कासित छोटू सिंह को पटना के जक्कनपुर से उठाया      आजम खान से केवल इसलिए मिलना चाहते थे अखिलेश? AIMIM के वारिस पठान ने किया ये दावा      Investigation : BIPARD में गेस्ट फैकल्टी बन अधिकारियों ने 3 साल में कमाये 8 करोड़, पैनल में नाम नहीं फिर भी हुआ पेमेंट      तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत, सैकड़ों ज़ख़्मी      MLC वोटिंग से पहले आधी रात को 7 गाड़ियों में पहुंची पुलिस, पटना में RJD प्रत्याशी डॉ संजीव के घर क्या हुआ?      पीएम मोदी 'चिन्मय अमृत महोत्सव' में शामिल होंगे: संस्थान आम लोगों तक गीता का ज्ञान पहुंचा रहा; पिछले साल भी...      सौरभ दास ने बाहर आते ही किया 'कांड', नहीं मानी पुलिस की बात; रांका भी घिरे, Ncr Hindi News     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
व्यापार

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा: सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की MPMS 2.0 योजना की शुरुआत की

भारत में मोबाइल निर्माण को नई ऊंचाइयां देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े कदम के तहत 62,500 करोड़ रुपये की MPMS 2.0 योजना का ऐलान किया है, जिससे घरेलू ब्रांड्स और स्थानीय कलपुर्जों के उत्पादन को भारी बढ़ावा मिलेगा।

A
Ankit Yadav
22 अग 2026, 12:56
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा: सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की MPMS 2.0 योजना की शुरुआत की
भारतीय प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बेहद अहम मोड़ पर, देश में मोबाइल उत्पादन को अभूतपूर्व विस्तार देने के उद्देश्य से एक नई और महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की गई है। इस ताज़ा पहल के तहत, सरकार ने कुल 62,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली एमपीएमएस 2.0 (MPMS 2.0) स्कीम को आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य देश के भीतर ही उन्नत तकनीकों के साथ मोबाइल फोन बनाने की क्षमताओं को मजबूत करना है, ताकि वैश्विक स्तर पर भारत एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक हब के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर सके।

घरेलू कंपनियों और स्थानीय घटकों पर विशेष ध्यान

इस नई नीतिगत रूपरेखा के केंद्र में स्वदेशी ब्रांडों को सशक्त करना और स्थानीय स्तर पर कलपुर्जों यानी कॉम्पोनेंट्स के निर्माण को बढ़ावा देना है। अब तक भारतीय बाजार में विदेशी निर्माताओं का बड़ा दबदबा रहा है, लेकिन इस स्कीम के जरिए सरकार का प्रयास है कि घरेलू उद्यम आगे आएं और आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत हिस्सेदारी दर्ज करें। योजना के प्रावधानों के तहत उन उद्योगों को प्राथमिकता और प्रोत्साहन दिया जाएगा जो देश के भीतर ही डिस्प्ले, बैटरी, और अन्य महत्वपूर्ण मोबाइल पार्ट्स का निर्माण करते हैं। इससे आयात पर निर्भरता में भारी कमी आएगी और देश में ही एक संपूर्ण और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम का विकास हो सकेगा। रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से भी इस मेगा स्कीम को गेम-चेंजर माना जा रहा है। जब देश के विभिन्न हिस्सों में मोबाइल और उसके कलपुर्जों की फैक्ट्रियां लगेंगी, तो लाखों नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के वित्तीय पैकेजों से देश में युवाओं के लिए कौशल विकास के नए रास्ते खुलेंगे और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में कुशल कामगारों की मांग पूरी की जा सकेगी। सरकार का यह कदम 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने में मददगार साबित होगा।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और आगे की राह

जैसे ही इस योजना की घोषणा हुई, देश के तकनीकी और व्यावसायिक हलकों में इसका स्वागत किया गया। उद्योग संघों और प्रमुख विनिर्माताओं का कहना है कि 62,500 करोड़ रुपये का यह भारी-भरकम फंड उन बाधाओं को दूर करने में कारगर होगा जिनका सामना घरेलू कंपनियां अक्सर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौरान करती हैं। आने वाले महीनों में इस योजना के विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जिसके बाद विभिन्न कंपनियां इसके तहत आवेदन कर सकेंगी और सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता और अन्य रियायतों का लाभ उठा पाएंगी। उम्मीद जताई जा रही है कि यह नीति देश को आने वाले कुछ वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल निर्यातक बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज