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वैश्विक मंच पर स्वदेशी का परचम: यूपी की 'ओडीओपी' योजना से अंतरराष्ट्रीय बाजार में छाई फिरोजाबाद की प्रसिद्ध ग्लास इंडस्ट्री
उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जनपद एक उत्पाद' (ODOP) योजना के सहयोग से फिरोजाबाद का पारंपरिक कांच और चूड़ी उद्योग दुनिया के 100 से अधिक देशों में धूम मचा रहा है।
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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 18:20
उत्तर प्रदेश के सुप्रसिद्ध 'सुहाग नगर' यानी फिरोजाबाद का सदियों पुराना कांच उद्योग (Glass Industry) अब केवल घरेलू सीमाओं तक सीमित न रहकर वैश्विक निर्यात के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'एक जनपद एक उत्पाद' (One District One Product - ODOP) योजना और एमएसएमई प्रोत्साहन नीतियों के कारण फिरोजाबाद के कांच निर्माताओं को आधुनिक तकनीक, वैश्विक ब्रांडिंग और आसान ऋण सुविधाएं प्राप्त हुई हैं। इसी का सुखद परिणाम है कि फिरोजाबाद में बने कलात्मक कांच के बर्तन, झूमर, सजावटी सामान और चूड़ियां आज अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और पूर्वी एशियाई देशों सहित दुनिया के 100 से अधिक देशों में बड़े पैमाने पर निर्यात किए जा रहे हैं।
पर्यावरण-अनुकूल सीएनजी भट्टियों और आधुनिक डिजाइन का कमाल
ओडीओपी योजना के तहत सरकार द्वारा फिरोजाबाद में एक अत्याधुनिक 'ग्लास डिजाइनिंग एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर' (CFC) स्थापित किया गया है, जहां स्थानीय कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग के अनुसार नए डिजाइनों और फिनिशिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण के लिए पारंपरिक कोयला भट्टियों को पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल सीएनजी (CNG) भट्टियों में परिवर्तित कर दिया गया है। इससे न केवल कांच की गुणवत्ता और चमक में अभूतपूर्व सुधार हुआ है, बल्कि उत्पादन लागत में कमी आने से फिरोजाबाद के उत्पाद चीनी (Chinese) कांच उत्पादों की तुलना में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं।
लाखों कारीगरों की आजीविका और निर्यात में भारी उछाल
उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष के दौरान फिरोजाबाद के ग्लास सेक्टर से होने वाले कुल निर्यात में 35 प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल दर्ज किया गया है। इस उद्योग से जिले के लगभग 5 लाख से अधिक कारीगर, मजदूर और छोटे उद्यमी सीधे तौर पर अपनी आजीविका चला रहे हैं। फिरोजाबाद के निर्यातकों का कहना है कि आगामी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों में यूपी ओडीओपी पैवेलियन के जरिए उन्हें कई बड़े विदेशी ऑर्डर मिले हैं। सरकार का यह प्रोत्साहन साबित करता है कि पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प में सही दिशा और तकनीकी सहायता मिलने पर दुनिया के बाजारों पर राज करने की पूरी क्षमता मौजूद है।