भारतीय नौसेना ने आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अत्याधुनिक स्वदेशी गाइडेड मिसाइल विध्वंसक, आईएनएस विशाखापट्टनम को हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात करने की घोषणा की है। यह तैनाती समुद्री सुरक्षा और क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से की गई है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, यह पोत स्वदेशी तकनीकी का एक अद्भुत नमूना है और इसमें आधुनिकतम रडार और मिसाइल प्रणालियां लगी हैं जो दुश्मन के किसी भी हमले को विफल करने में सक्षम हैं। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने इस तैनाती को 'आत्मनिर्भर भारत' की एक और बड़ी उपलब्धि करार दिया है।
रणनीतिक महत्व की तैनाती इस पोत के तैनात होने से न केवल भारतीय जलसीमा की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यह क्षेत्र में समुद्री डकैती और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि विशाखापट्टनम की उपस्थिति से हिंद महासागर में भारत का दबदबा और अधिक बढ़ेगा। यह पोत 15,000 टन से अधिक का विस्थापन रखता है और इसमें सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात हैं जो इसे किसी भी युद्ध की स्थिति में एक घातक हथियार बनाती हैं। नौसेना का यह भी कहना है कि आने वाले महीनों में इसी तरह के दो और विध्वंसक पोत सेवा में शामिल किए जाएंगे।
तकनीकी क्षमता और भविष्य की योजनाएं आईएनएस विशाखापट्टनम में उपयोग की गई 'स्टेल्थ' तकनीक इसे रडार की पकड़ से दूर रखती है, जो इसे समुद्र में एक अदृश्य शिकारी बनाती है। इस पोत के संचालन के लिए 300 से अधिक नौसैनिकों का दल नियुक्त किया गया है, जिन्हें विशेष रूप से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों को संभालने का प्रशिक्षण दिया गया है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत एक बड़ा रक्षात्मक बदलाव है। आने वाले दिनों में यह पोत अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भी भाग लेने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती मिलेगी।