राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में मानसून की लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पिछले कई वर्षों के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की प्राथमिक वेधशाला सफदरजंग ने अगस्त के केवल शुरुआती आठ दिनों के भीतर ही 238.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की है। यह आंकड़ा इस पूरे अगस्त महीने की सामान्य औसत वर्षा दर (233.1 मिमी) को बेहद कम समय में पार कर गया है। लगातार जारी तेज बारिश के कारण दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों, जैसे कि आईटीओ, मिंटो ब्रिज, धौला कुआँ और लुटियंस दिल्ली की निचली सड़कों पर जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो गई है, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है।
उधर, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते हरियाणा के हथनीकुंड बैराज से लगातार लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप राजधानी में यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और यह पुराने रेलवे पुल (Old Railway Bridge) पर खतरे के निशान 205.33 मीटर के बेहद करीब पहुँच गया है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। नदी के तटीय और निचले इलाकों (जैसे कि मयूर विहार फेज़-1, यमुना बाज़ार और कश्मीरी गेट) में रहने वाले लोगों को मुनादी कराकर सुरक्षित स्थानों और अस्थायी राहत शिविरों में जाने की सख्त हिदायत दी जा रही है।
नागरिक निकाय अलर्ट पर, मौसम विभाग ने जारी किया नया अलर्ट
दिल्ली नगर निगम (MCD), जल बोर्ड और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमों को चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया है। जलभराव वाली संवेदनशील सड़कों और अंडरपासों से पानी निकालने के लिए सैकड़ों हाई-कैपेसिटी मोबाइल पंपिंग सेट लगाए गए हैं। एमसीडी ने नियंत्रण कक्षों को सक्रिय कर दिया है और आपातकालीन प्रतिक्रिया दलों को जलभराव तथा पेड़ों के गिरने की शिकायतों का तुरंत निस्तारण करने के निर्देश जारी किए हैं।
मौसम विभाग ने अगले 48 से 72 घंटों के दौरान दिल्ली-एनसीआर और उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताते हुए 'येलो अलर्ट' जारी रखा है। प्रशासन ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बहुत आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें और जलभराव वाले रास्तों या जलमग्न अंडरपासों में वाहन ले जाने से बचें। लगातार बारिश से तापमान में गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन बुनियादी ढाँचे पर पड़े दबाव ने प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी है।