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किसानों का कड़ा विरोध: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और एमएसपी के खिलाफ दिल्ली मार्च रोका गया

भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी जैसी मांगों को लेकर किसानों द्वारा निकाली जा रही पदयात्रा को हरियाणा प्रशासन ने सीमा पर ही रोक दिया है।

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Kantap News डेस्क
17 अग 2026, 15:59
किसानों का कड़ा विरोध: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और एमएसपी के खिलाफ दिल्ली मार्च रोका गया
देश की राजधानी दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसान संगठनों के जत्थे को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस और प्रशासन ने राज्य की सीमाओं पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए हैं। 'किसान बचाओ पदयात्रा' के बैनर तले सैकड़ों किसान एमएसपी पर कानून बनाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से घरेलू कृषि क्षेत्र को होने वाले कथित नुकसान का विरोध करने के लिए लामबंद हुए हैं। प्रशासन का तर्क है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था, जबकि किसान नेताओं ने सरकार पर दमनकारी नीतियां अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। सीमाओं पर भारी पुलिस बल की तैनाती और सीमेंट के बैरिकेड्स लगाए जाने के कारण यातायात भी प्रभावित हुआ है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रमुख मांगें और राजनीतिक पारा

किसानों का मुख्य कहना है कि विदेशी ताकतों के साथ होने वाले व्यापारिक समझौतों से देश के छोटे किसानों की आजीविका पर सीधा संकट आ जाएगा, जिसे वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके अलावा फसल खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी उनका सबसे पुराना और प्रमुख मुद्दा बना हुआ है, जिस पर सरकार के साथ कई दौर की बातचीत बेनतीजा साबित हो चुकी है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए किसानों की मांगों को जायज ठहराया है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के उनके अधिकार का समर्थन किया है। दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि देश का कृषि क्षेत्र हर संभव तरीके से संरक्षित किया जा रहा है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सुरक्षा व्यवस्था और आगे की रणनीति

सीमाई इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने धारा लागू कर दी है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैनात किया गया है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया तो वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ सकते हैं, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इस गतिरोध को तोड़ने के लिए खुफिया एजेंसियां और प्रशासनिक अधिकारी लगातार किसान प्रतिनिधियों के संपर्क में हैं ताकि बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके। देश भर की निगाहें इस समय इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और किसानों के बीच यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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