वाराणसी के विकास के लिए एक और बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने आज 500 करोड़ रुपये की एक विस्तृत योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य गंगा नदी के किनारे बसे प्राचीन घाटों की संरचनात्मक सुरक्षा और सौंदर्यीकरण करना है। कई घाटों पर समय के साथ दरारें आ गई थीं, जिन्हें अब पारंपरिक वास्तुशिल्प शैलियों का उपयोग करके ठीक किया जाएगा। इस परियोजना का काम अगले महीने से शुरू होकर अगले दो वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है।
संरक्षण की तकनीकें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों की निगरानी में पत्थरों की सफाई और नक्काशी की जाएगी। घाटों की सीढ़ियों को अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक जल-निकासी प्रणाली भी लगाई जाएगी, जिससे मानसून के दौरान जलभराव की समस्या का समाधान हो सके। इसके अलावा, घाटों के पास सफाई के लिए नई मशीनों और कचरा प्रबंधन संयंत्रों को स्थापित किया जाएगा ताकि गंगा नदी की स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके। यह परियोजना पर्यटन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है।
पर्यटन और रोजगार पर प्रभाव सरकार का अनुमान है कि इस परियोजना के बाद पर्यटन में 30% तक की वृद्धि हो सकती है। घाटों के आसपास स्थानीय हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह न केवल शहर के गौरव को बढ़ाएगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का एक शानदार प्रयास भी है। स्थानीय प्रशासन ने भी इस योजना में जन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है।