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शांति पहल: रूस और यूक्रेन के बीच आंशिक युद्धविराम के लिए भारत का तीन सूत्री प्रस्ताव

रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण संघर्ष के पांच साल पूरे होने पर भारत ने एक अहम कदम उठाया है। भारत की ओर से दोनों देशों के सामने ऊर्जा ढांचे और समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक नया प्रस्ताव रखा गया है। इस मध्यस्थता का उद्देश्य दुनिया भर में फैल रहे आर्थिक और मानवीय संकट को थामना है।

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Ankit Yadav
18 अक्ट 2026, 16:29
शांति पहल: रूस और यूक्रेन के बीच आंशिक युद्धविराम के लिए भारत का तीन सूत्री प्रस्ताव

भारत का तीन सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव

नई दिल्ली की ओर से पेश किए गए इस नए खाके में कुछ खास और बहुत महत्वपूर्ण इलाकों में युद्ध रोकने की बात कही गई है। इस योजना के तहत सबसे पहले ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचों पर किसी भी प्रकार के हमले पूरी तरह से रोके जाने चाहिए। इसके अलावा काला सागर के रास्ते होने वाले व्यापार को बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रखना इस रणनीति का अहम हिस्सा है। व्यावसायिक और माल ढोने वाले समुद्री जहाजों पर किसी भी तरह की बमबारी या गोलाबारी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस पूरी पहल का मुख्य लक्ष्य इस भयंकर लड़ाई के कारण दुनिया भर में पैदा हुई भारी कठिनाइयों को कम करना है। खाद्यान्न संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से दुनिया के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले आम लोगों को बहुत भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध के मैदान से मीलों दूर बैठे लोगों की थाली तक भोजन सुरक्षित पहुंचाने और नाविकों की जान बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। रूस और यूक्रेन दोनों ने ही इन सुझावों का स्वागत किया है और इनके प्रति अपनी सकारात्मक सोच दिखाई है। मॉस्को ने अपने भारतीय मित्रों की तरफ से आई इस तत्परता और उनके द्वारा सुझाए गए उपायों के लिए खुलकर आभार जताया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और अन्य देशों के प्रयास

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कीव को मिल चुके चार अलग-अलग प्रस्तावों में से भारत वाले खाके को सबसे बड़ा और व्यापक बताया है। अमेरिका, तुर्की और मिस्र की तरफ से भी इस दिशा में अपने-अपने स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। वाशिंगटन ने ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने और अनाज गलियारे को फिर से चालू करने के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक कराने का सुझाव दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 अक्टूबर को अचानक ऊर्जा युद्धविराम लागू होने की घोषणा कर दी थी जिसके बाद राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने विवरण मिलने का इंतजार करने की बात कही थी। हालांकि मॉस्को की तरफ से उस घोषणा पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। तुर्की और मिस्र के प्रस्तावों की बात करें तो उन्होंने अपनी योजनाओं की सामग्री का खुलकर खुलासा नहीं किया है। फिर भी रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनका मुख्य जोर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करते हुए अनाज की आपूर्ति सुचारू रखना है। जुलाई 2022 में तुर्की और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से एक समझौता हुआ था जिसके तहत ओडेसा, चोरनोमोर्स्क और युझनी बंदरगाहों से कृषि उत्पादों का निर्यात होता था। लेकिन 18 जुलाई 2023 के बाद रूसी पक्ष ने इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने से साफ मना कर दिया था और सुरक्षा की अपनी गारंटी वापस ले ली थी। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार उस पुरानी पहल के दौरान कुल 730 जहाजों के जरिए 32.9 मिलियन मीट्रिक टन खाद्य सामग्री भेजी गई थी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर युद्ध का गहरा प्रभाव

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस टकराव की शुरुआत हुए पांच साल का लंबा वक्त बीत चुका है और निकट भविष्य में इसके थमने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। बल्कि पिछले कुछ महीनों में इस हिंसा में और अधिक तेजी आई है जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। दुनिया के तमाम हिस्सों में भोजन और रसोई के ईंधन की भारी किल्लत पैदा हो गई है और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा समुद्र के रास्तों पर व्यापार करने वाले जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा पर भी लगातार खतरा बना हुआ है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने इन भू-राजनीतिक हालात को और ज्यादा उलझा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जैसे कई बड़े वैश्विक नेताओं ने बीच-बचाव के प्रयास किए हैं लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम हासिल नहीं हुआ है। भारतीय रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है कि यह दौर युद्ध का नहीं है और इस अंतहीन लड़ाई को अब समाप्त हो जाना चाहिए। भारत के दोनों पक्षों के साथ अच्छे संबंध हैं और दोनों को ही भारत की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है। भारत के ये नए प्रस्ताव बुनियादी ढांचे और शिपिंग सुरक्षा दोनों को एक साथ जोड़ते हैं जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।

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