अरुणाचल में चीनी सैनिकों से अब भी तनातनी! ITBP चीफ बोले- हमारे शौर्य कमांडो तैयार
Bihar MLC Election 2026 Live: चुनाव के बीच STF की बड़ी कार्रवाई, JDU से निष्कासित छोटू सिंह को पटना के जक्कनपुर से उठाया
आजम खान से केवल इसलिए मिलना चाहते थे अखिलेश? AIMIM के वारिस पठान ने किया ये दावा
Investigation : BIPARD में गेस्ट फैकल्टी बन अधिकारियों ने 3 साल में कमाये 8 करोड़, पैनल में नाम नहीं फिर भी हुआ पेमेंट
तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत, सैकड़ों ज़ख़्मी
MLC वोटिंग से पहले आधी रात को 7 गाड़ियों में पहुंची पुलिस, पटना में RJD प्रत्याशी डॉ संजीव के घर क्या हुआ?
पीएम मोदी 'चिन्मय अमृत महोत्सव' में शामिल होंगे: संस्थान आम लोगों तक गीता का ज्ञान पहुंचा रहा; पिछले साल भी...
सौरभ दास ने बाहर आते ही किया 'कांड', नहीं मानी पुलिस की बात; रांका भी घिरे, Ncr Hindi News
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
छात्रों को झटका: अमेरिका में भारतीय अंडरग्रेजुएट दाखिलों में 15 प्रतिशत की गिरावट
अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने की चाह रखने वाले भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के अंडरग्रेजुएट (यूजी) दाखिलों में भारी कमी दर्ज की गई है।
A
Ankit Yadav
26 अग 2026, 13:28
पिछले कुछ वर्षों से लगातार अमेरिका को दुनिया भर के विद्यार्थियों के लिए एक प्रमुख शैक्षणिक गंतव्य माना जाता रहा है, विशेष रूप से भारत से हर साल लाखों छात्र अपनी उच्च शिक्षा के सपने को पूरा करने के लिए वहां का रुख करते हैं। हालांकि, हाल ही में आए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में भारतीय छात्रों के अंडरग्रेजुएट यानी यूजी एडमिशन में लगभग पंद्रह प्रतिशत की स्पष्ट गिरावट देखने को मिली है। इस गिरावट ने न केवल शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों को बल्कि उन अभिभावकों और छात्रों को भी चिंता में डाल दिया है जो अपनी उच्च शिक्षा की योजनाएं अमेरिकी संस्थानों के आधार पर तैयार कर रहे थे। इस स्थिति के पीछे विभिन्न प्रकार के आर्थिक, प्रशासनिक और सामाजिक कारण हो सकते हैं, जिनकी गहराई से समीक्षा की जा रही है।
कमी के संभावित कारण और चुनौतियां
इस प्रकार दाखिलों में आई इस अप्रत्याशित कमी के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अमेरिका में लगातार बढ़ती हुई शिक्षण फीस और वहां के जीवन-यापन के महंगे खर्च ने कई मध्यमवर्गीय भारतीय परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसके अलावा, वीजा प्रक्रिया में आने वाली जटिलताएं और अमेरिकी दूतावासों द्वारा अपनाए जाने वाले कड़े नियम भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कई बार छात्रों को समय पर वीजा न मिलने के कारण अपनी दाखिला प्रक्रिया बीच में ही छोड़नी पड़ती है या फिर वे अन्य देशों के विकल्पों की तलाश करने लगते हैं। इन सभी प्रशासनिक बाधाओं के कारण भारतीय युवाओं का रुझान अब अमेरिका के मुकाबले अन्य यूरोपीय या एशियाई देशों की ओर अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जहां शिक्षा के बेहतर और किफायती अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
भविष्य पर प्रभाव और आगे की राह
अमेरिकी शिक्षण संस्थानों और नीति निर्माताओं के लिए यह गिरावट एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि भारतीय छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था और कैंपस विविधता में एक बहुत बड़ा योगदान देते हैं। यदि दाखिलों का यह नकारात्मक रुझान लंबे समय तक जारी रहता है, तो इससे अमेरिकी विश्वविद्यालयों के अंतरराष्ट्रीय राजस्व और सांस्कृतिक संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, भारतीय छात्रों के लिए यह स्थिति एक नए अवसर की तरह भी उभर रही है, जहां वे वैश्विक स्तर पर अन्य देशों के विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिकी सरकार और विश्वविद्यालय इस गिरावट को रोकने के लिए कोई विशेष रियायतें या छात्रवृत्तियां प्रदान करते हैं या नहीं, जिससे भारतीय छात्रों का भरोसा फिर से बहाल किया जा सके।