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खेल संकल्प: वार्ष्णेय कॉलेज की प्राचार्या ने छात्रों को दिया शारीरिक गतिविधियों का संदेश
वार्ष्णेय कॉलेज में प्राचार्या ने विद्यार्थियों के लिए शारीरिक गतिविधियों और खेलों के महत्व पर जोर देते हुए उन्हें प्रतिदिन कम से कम एक घंटा खेलकूद में बिताने का विशेष संकल्प दिलाया।
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Ankit Yadav
01 सित 2026, 16:56
उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी क्रम में वार्ष्णेय कॉलेज परिसर के भीतर छात्र-छात्राओं को मानसिक रूप से मजबूत और शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए एक विशेष अभियान का संचालन किया गया। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि केवल किताबी ज्ञान से युवाओं का समग्र विकाससंभव नहीं है, बल्कि इसके लिए खेलकूद और अन्य बाहरी गतिविधियां भी उतनी ही आवश्यक हैं जितनी कि कक्षा की पढ़ाई। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संस्था की प्राचार्या ने विद्यार्थियों को प्रेरित करने का बीड़ा उठाया और उन्हें अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
छात्रों को मिला खेल का महत्व समझाने वाला विशेष संदेश
कार्यक्रम के दौरान कॉलेज की प्राचार्या ने सभी छात्र-छात्राओं को संबोधित किया और उन्हें अपने व्यस्त दैनिक जीवन से कम से कम साठ मिनट का समय खेलकूद के लिए निकालने का संकल्प दिलाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिस तरह से तकनीक और गैजेट्स में व्यस्त होती जा रही है, उससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इस प्रवृत्ति को बदलने के लिए मैदान पर उतरना और पसीना बहाना बेहद जरूरी है। खेल न केवल हमारे शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखते हैं, बल्कि हमारे भीतर अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और संघर्ष करने की शक्ति को भी जागृत करते हैं। प्राचार्या के इस आह्वान से वहां मौजूद सभी विद्यार्थियों में काफी उत्साह देखा गया और उन्होंने पूरे जोश के साथ इस संकल्प को दोहराया।
परिसर में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम
इस प्रकार के आयोजनों से शैक्षणिक संस्थानों में एक सकारात्मक माहौल का निर्माण होता है। वार्ष्णेय कॉलेज में लिया गया यह संकल्प इस बात का गवाह है कि शिक्षक अब केवल अकादमिक परिणामों तक ही सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे अपने विद्यार्थियों के भविष्य को स्वास्थ्य और फिटनेस के नजरिए से भी मजबूत बनाना चाहते हैं। आने वाले दिनों में कॉलेज प्रशासन द्वारा खेलकूद प्रतियोगिताओं और अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों का दायरा बढ़ाने की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि हर छात्र अपनी रुचि के अनुसार किसी न किसी खेल से जुड़ सके।
इस पहल से अभिभावकों और स्थानीय शैक्षणिक حلقों में भी काफी सराहना की जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि शिक्षण संस्थानों में खेल संस्कृति को इसी तरह बढ़ावा मिलता रहा, तो हमारे युवा न केवल पढ़ाई में बल्कि हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने में सफल होंगे। कॉलेज के विद्यार्थियों ने भी इस संकल्प को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का पूरा भरोसा दिलाया है, जिससे आने वाले समय में परिसरों की खेल प्रतिभाओं को एक नया मंच मिलने की पूरी उम्मीद है।