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शैक्षणिक नापसंद: एचबीटीयू के लेदर एंड फैशन टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम से छात्रों का मोहभंग
कानपुर के प्रतिष्ठित हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) में लेदर एंड फैशन टेक्नोलॉजी विषय की पढ़ाई को लेकर छात्रों की बेरुखी सामने आ रही है, जिससे कई प्रकार की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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Ankit Yadav
04 सित 2026, 12:14
उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय यानी एचबीटीयू अपनी तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के लिए पूरे राज्य में एक विशेष पहचान रखता है। यहां संचालित होने वाले विभिन्न इंजीनियरिंग और तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए छात्र सालभर कड़ी मेहनत करते हैं। हालांकि, हाल ही में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, इस प्रतिष्ठित संस्थान के लेदर एंड फैशन टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम को लेकर छात्रों के बीच रुझान कम होता दिख रहा है। कई छात्र इस विशेष स्ट्रीम की पढ़ाई के प्रति नाखुशी जाहिर कर रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष भी एक नया अकादमिक सवाल खड़ा हो गया है।
बदलते रुझान और करियर की प्राथमिकताएं
कानपुर ऐतिहासिक रूप से चमड़ा उद्योग और औद्योगिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र रहा है, जिसके मद्देनजर इस प्रकार के तकनीकी पाठ्यक्रमों की शुरुआत की गई थी ताकि स्थानीय और वैश्विक उद्योगों के लिए कुशल पेशेवर तैयार किए जा सकें। इसके बावजूद, आधुनिक दौर के विद्यार्थियों की प्राथमिकताएं अब तेजी से बदल रही हैं। पारंपरिक लेदर और फैशन टेक्नोलॉजी जैसे विशिष्ट विषयों की तुलना में छात्र कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उभरती हुई कोर इंजीनियरिंग शाखाओं की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। इस बदलते परिवेश के कारण लेदर एंड फैशन टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स अब छात्रों की पहली पसंद नहीं बन पा रहे हैं, जिसके चलते दाखिले और पाठ्यक्रम की लोकप्रियता पर भी असर पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय परिसरों में अक्सर इस बात पर मंथन किया जाता है कि कैसे पारंपरिक और पुराने तकनीकी पाठ्यक्रमों को आधुनिक समय की मांग के अनुसार ढाला जाए ताकि युवाओं का उनमें फिर से भरोसा कायम हो सके। जानकारों का मानना है कि लेदर और फैशन उद्योग में आ रहे आधुनिक बदलावों को यदि पाठ्यक्रम में बेहतर तरीके से शामिल किया जाए और छात्रों को प्लेसमेंट तथा भविष्य की संभावनाओं के प्रति आश्वस्त किया जाए, तो इस स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। संस्थान के स्तर पर भी इन विषयों के प्रति छात्रों की घटती रुचि के कारणों का गहराई से विश्लेषण किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि एचबीटीयू प्रशासन इस अकादमिक चुनौती से निपटने के लिए किस प्रकार की रणनीतिक पहल करता है। क्या पाठ्यक्रम के ढांचे में कुछ बदलाव किए जाएंगे या फिर छात्रों की काउंसलिंग के जरिए उनकी धारणा को बदलने का प्रयास होगा, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, यह पूरा मामला शिक्षा जगत और तकनीकी संस्थानों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां पारंपरिक कोर्सों के भविष्य को लेकर नए सिरे से विचार-विमर्श शुरू हो गया है।