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शिक्षक दिवस का महत्व: पांच सितंबर को क्यों मनाया जाता है यह खास पर्व
देशभर में पांच सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस विशेष दिन के इतिहास, महत्व और इससे जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे में विस्तार से।
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Ankit Yadav
05 सित 2026, 11:29
देश भर में हर साल पांच सितंबर का दिन शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में तमाम तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसके जरिए छात्र अपने गुरुओं के योगदान को याद करते हैं। विद्यार्थियों के जीवन को सही आकार देने और उन्हें एक बेहतर इंसान बनाने में शिक्षकों की भूमिका को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि समाज के निर्माण में शिक्षा और ज्ञान का प्रसार करने वाले गुरुओं का स्थान कितना सर्वोच्च और महत्वपूर्ण होता है।
शिक्षक दिवस का ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भ
भारत में पांच सितंबर की तारीख को शिक्षक दिवस के रूप में मनाए जाने के पीछे एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कारण जुड़ा हुआ है। यह विशेष दिवस देश के महान दार्शनिक, शिक्षाविद् और प्रथम उपराष्ट्रपति तथा दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। जब वे देश के सर्वोच्च पद पर आसीन थे, तब उनके कुछ छात्रों और प्रशंसकों ने उनसे आग्रह किया था कि उनके जन्मदिन को विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाए। इसके जवाब में डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था कि यदि उनके जन्मदिन को अलग से सेलिब्रेट करने के बजाय शिक्षकों के सम्मान को समर्पित कर दिया जाए, तो उन्हें बेहद गर्व और प्रसन्नता महसूस होगी। तब से लेकर आज तक हर साल इस तारीख को शिक्षक दिवस के रूप में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है।
समाज में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और वैचारिक क्रांति लाने में डॉ. राधाकृष्णन का योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने पूरे जीवनकाल में अध्यापन और बौद्धिक विकास को ही अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता माना था। उनके विचार आज भी देश के युवाओं और शिक्षकों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करते हैं। यही वजह है कि उनके जन्मदिन को केवल एक जयंती के रूप में नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र में गुरु-शिष्य परंपरा के महापर्व के रूप में देखा जाता है। इस दिन सरकार की तरफ से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जाता है, जिससे उनकी मेहनत और समर्पण को उचित पहचान मिल सके।
वर्तमान समय में जब शिक्षा का दायरा तेजी से बदल रहा है और तकनीक का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, तब भी एक अच्छे शिक्षक की महत्ता कभी कम नहीं हो सकती है। नैतिक मूल्यों के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान प्रदान करना आज के समय में शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुका है। नई पीढ़ी को सही दिशा दिखाने का कार्य केवल किताबी ज्ञान से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए एक आदर्श गुरु की प्रेरणा अनिवार्य होती है। आने वाले समय में भी शिक्षक दिवस का यह पर्व हमारी सांस्कृतिक और शैक्षणिक धरोहर को मजबूत बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभाता रहेगा, जिससे समाज लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे।