स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत ने एक बार फिर अपनी चिकित्सीय दक्षता का लोहा मनवाया है। चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर के सर्जनों ने एक गंभीर रूप से बीमार फेफड़े के संक्रमण से पीड़ित मरीज पर देश का पहला सफल कृत्रिम फेफड़ा यानी एक्सट्रामोरपोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजिनेशन आधारित पोर्टेबल लंग सपोर्ट सिस्टम प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक पूरा किया है। मरीज पिछले कई महीनों से गंभीर रेस्पिरेटरी फेलियर से जूझ रहा था और पारंपरिक उपचारों से उसे कोई राहत नहीं मिल रही थी। डॉ. बालाकृष्णन और उनकी विशेष टीम ने बारह घंटे चली इस मैराथन सर्जरी को बिना किसी जटिलता के पूरा किया।
अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों का चमत्कार इस जटिल प्रक्रिया में मरीज के क्षतिग्रस्त अंगों को अस्थायी रूप से एक कृत्रिम प्रणाली द्वारा सहारा दिया गया, जिससे उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य बनाए रखा जा सका। डॉक्टरों के अनुसार, इस तकनीक का उपयोग उन मामलों में वरदान साबित होता है जहाँ पारंपरिक वेंटिलेटर भी काम करना बंद कर देते हैं। अस्पताल के प्रशासन ने बताया कि मरीज की रिकवरी बेहद संतोषजनक है और उसे आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए नई उम्मीद की किरण इस अभूतपूर्व सफलता के बाद देश के अन्य हिस्सों के अस्पतालों से भी इस उन्नत तकनीक को अपनाने के लिए पूछताछ शुरू हो गई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उन्नत शल्य चिकित्सा पद्धतियों के भारत में किफायती दरों पर उपलब्ध होने से विदेशी मरीजों के लिए भी देश मेडिकल टूरिज्म का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।