गोरखपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पड़ोसी देश नेपाल से आने वाले मरीजों को बड़ी सौगात दी है। सोमवार को एम्स प्रबंधन ने एक नए और अत्याधुनिक न्यूरोसर्जरी विभाग के विधिवत संचालन की घोषणा की। अब तक ब्रेन ट्यूमर, स्पाइनल इंजरी, एन्यूरिज्म और अन्य जटिल तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को लखनऊ या दिल्ली के बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें स्थानीय स्तर पर ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। इस नए विभाग में उच्च तकनीक वाले माइक्रोस्कोप, नेविगेशन सिस्टम और अत्याधुनिक न्यूरो-ऑपरेशन थिएटर की स्थापना की गई है, जिससे जटिल से जटिल सर्जरी को भी बेहद सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया जा सकेगा।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और कम खर्च में इलाज
एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस विभाग के शुरू होने से क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। यहां आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों का मुफ्त या बेहद कम खर्च में इलाज किया जाएगा। विभाग में देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से प्रशिक्षित अनुभवी न्यूरोसर्जन और तकनीशियनों की टीम तैनात की गई है जो चौबीस घंटे आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने के लिए तैयार है। इसके अलावा, पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के लिए एक अलग हाई-टेक आईसीयू वार्ड भी बनाया गया है ताकि सर्जरी के बाद मरीजों की बेहतर तरीके से देखरेख की जा सके और रिकवरी तेजी से हो सके।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने एम्स गोरखपुर की इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। उद्घाटन के पहले ही दिन ओपीडी में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी से संबंधित परामर्श के लिए सैकड़ों मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। अस्पताल प्रशासन ने आने वाले दिनों में टेलीमेडिसिन सेवाओं को भी न्यूरोसर्जरी विभाग से जोड़ने की योजना बनाई है ताकि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में बैठे मरीज भी ऑनलाइन परामर्श प्राप्त कर सकें। इस कदम से न केवल गोरखपुर बल्कि पूरे पूर्वांचल क्षेत्र के स्वास्थ्य ढांचे में अभूतपूर्व सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।