केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के 50 शहरों में रोबोटिक सर्जरी केंद्रों के नेटवर्क की शुरुआत की। इस परियोजना का लक्ष्य जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं को अधिक सटीक और किफायती बनाना है। रोबोटिक तकनीक के उपयोग से अब सर्जरी के बाद ठीक होने का समय काफी कम हो जाएगा और मरीजों को कम दर्द का अनुभव होगा। सरकार ने इसके लिए निजी अस्पतालों के साथ साझेदारी की है ताकि मध्यम वर्ग के लोगों को भी यह सुविधा सुलभ हो सके।
तकनीकी लाभ और मरीज की सुरक्षा इन रोबोटिक सिस्टम में नैनो-इमेजिंग कैमरे और उन्नत सेंसर लगे हैं, जो सर्जन को शरीर के अंदर का सूक्ष्म दृश्य प्रदान करते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से कैंसर के ऑपरेशन और हृदय संबंधित सर्जरी में क्रांतिकारी साबित होगी। पिछले कुछ वर्षों में, रोबोटिक सर्जरी केवल बड़े महानगरों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे टियर-2 और टियर-3 शहरों तक ले जाना एक बड़ी उपलब्धि है। सरकार ने इन सेंटर्स के लिए विशेष सब्सिडी योजना भी शुरू की है।
भविष्य का रोडमैप आने वाले समय में स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 200 करने का लक्ष्य रखा है। सरकार डॉक्टरों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल भी चला रही है ताकि वे रोबोटिक उपकरणों के संचालन में पूरी तरह दक्ष हो सकें। इस कदम से भारत आने वाले वर्षों में 'मेडिकल टूरिज्म' के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। कई देशों के विशेषज्ञ अब भारतीय मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं ताकि इसे अपने स्वास्थ्य ढांचों में लागू किया जा सके।