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स्वास्थ्य सेवाओं पर मंथन: मानसून सत्र में ग्रामीण अस्पतालों के लिए विशेष बजट आवंटन की मांग

संसद के मानसून सत्र में आज स्वास्थ्य मंत्रालय के कामकाज पर लंबी चर्चा हुई, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए विशेष बजट आवंटन की जोरदार मांग उठी।

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Kantap News डेस्क
10 अग 2026, 12:24
स्वास्थ्य सेवाओं पर मंथन: मानसून सत्र में ग्रामीण अस्पतालों के लिए विशेष बजट आवंटन की मांग

संसद के मानसून सत्र के दौरान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से जुड़े अनुदानों की मांगों पर चर्चा करते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसदों ने देश के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की पुरजोर वकालत की। चर्चा की शुरुआत करते हुए स्वास्थ्य मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष ने एक विस्तृत रिपोर्ट सदन के सामने रखी, जिसमें बताया गया कि ग्रामीण भारत के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में आज भी डॉक्टरों, आधुनिक उपकरणों और जीवन रक्षक दवाओं की भारी कमी बनी हुई है। सांसदों ने एक स्वर में मांग की कि आगामी वित्तीय योजनाओं में स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट का कम से कम एक बड़ा हिस्सा विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों के आधुनिकीकरण के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए।

डिजिटल हेल्थ मिशन और टेलीमेडिसिन की प्रगति केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए देश भर में चल रहे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और टेलीमेडिसिन सेवाओं की प्रगति का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 'ई-संजीवनी' टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही है, जिसके माध्यम से अब तक करोड़ों ग्रामीण मरीजों को देश के बड़े विशेषज्ञों से मुफ्त ऑनलाइन परामर्श मिल चुका है। इसके साथ ही, जिला अस्पतालों में क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) स्थापित करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में हर जिले के अस्पताल को सभी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस करना है ताकि मरीजों को इलाज के लिए महानगरों की ओर न दौड़ना पड़े।

संसदीय आम सहमति और भविष्य की रूपरेखा चर्चा के अंत में विभिन्न दलों के सांसदों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर स्वास्थ्य के मुद्दे पर मिलकर काम करने का संकल्प लिया। कई सदस्यों ने सुझाव दिया कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉक्टरों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए ताकि युवा चिकित्सक गांवों में जाकर काम करने के लिए प्रेरित हो सकें। मानसून सत्र में हुई इस सकारात्मक चर्चा से देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधारों की उम्मीद जग गई है, और आम जनता को आने वाले दिनों में बेहतर तथा सुलभ चिकित्सा सेवाएं मिलने की पूरी संभावना है।

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