अधिकारियों की सुस्ती पर कमिश्नर की सख्त नाराजगी
प्रशासनिक बैठकों के दौरान अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा की गई थी। इस समीक्षा में अधिकारियों की ओर से सुस्त कार्रवाई का मामला सामने आया। इस सुस्ती को देखकर कमिश्नर काफी खफा हुए और उन्होंने तुरंत अपनी नाराजगी व्यक्त की। शिक्षा और परिवहन व्यवस्था से जुड़े मामलों में ऐसी लापरवाही को उच्च स्तर पर गंभीरता से लिया जाता है। बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण यह मामला बेहद संवेदनशील माना जाता है। अधिकारियों की ढिलाई के कारण ही इस प्रकार की प्रशासनिक नाराजगी सामने आई है। कमिश्नर ने स्पष्ट रूप से अधिकारियों को अपनी कार्यशैली सुधारने की चेतावनी दी है। जनता से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की सुस्ती को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरी घटना के बाद से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और सभी संबंधित अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करने में जुट गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की नाराजगी का सामना न करना पड़े।
नोटिस भेजने के बजाय सीधे वाहन सीज करने का आदेश
समीक्षा बैठक के दौरान कमिश्नर ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि खानापूर्ति के लिए केवल नोटिस जारी करने की प्रक्रिया बंद की जाए। इसके बजाय सड़कों पर दौड़ रही अनफिट स्कूली बसों के खिलाफ सीधा एक्शन लिया जाना चाहिए। कुल 784 ऐसी बसें हैं जो मानकों पर खरी नहीं उतरती हैं और पूरी तरह अनफिट घोषित की गई हैं। इन सभी वाहनों को तत्काल प्रभाव से सीज किया जाना चाहिए ताकि कोई बड़ा हादसा न हो सके। केवल कागजी कार्रवाई करने से जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं होता है। यही कारण है कि कमिश्नर ने जमीनी और ठोस कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया है। अनफिट वाहनों के संचालन से सीधे तौर पर मासूम बच्चों की जान जोखिम में पड़ती है। इस खतरे को भांपते हुए ही कमिश्नर ने बिना किसी देरी के इन सभी वाहनों को अपने कब्जे में लेने का आदेश दिया है। परिवहन विभाग और अन्य संबंधित महकमों को इस निर्देश का पालन करने के लिए तुरंत अपनी टीमें गठित करनी होंगी ताकि अभियान चलाकर इन सभी वाहनों को पकड़ा जा सके।
विद्यार्थियों की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई की पृष्ठभूमि
स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होता है। समय-समय पर स्कूली वाहनों की फिटनेस की जांच के लिए नियम और कानून तय किए गए हैं। इन नियमों का पालन कराना स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है ताकि किसी भी दुर्घटना को समय रहते टाला जा सके। जब अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह से पालन नहीं करते हैं और केवल औपचारिकता निभाते हैं, तब उच्च अधिकारियों को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ता है। इस प्रकार के कड़े कदम उठाने से व्यवस्था में सुधार आता है और नियमों की अनदेखी करने वालों के मन में डर पैदा होता है। आने वाले दिनों में इस आदेश के तहत बड़े पैमाने पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है। अभिभावक भी लंबे समय से बच्चों की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए ऐसे कड़े प्रशासनिक कदमों की मांग करते रहे हैं। इस पूरी कार्रवाई से न केवल लापरवाह अधिकारियों को संदेश मिलेगा, बल्कि स्कूल प्रबंधन भी अपने वाहनों को समय पर फिट रखने के लिए मजबूर होगा। नियम तोड़ने वाले संचालकों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।