मोबाइल कोर्ट में सामने आई समस्याएं
गोरखपुर के विभिन्न इलाकों से अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर कई दिव्यांगजन सीरसी सेंटर पहुंचे थे। वहां आयोजित मोबाइल कोर्ट के दौरान लोगों ने अपनी रोजमर्रा की कठिनाइयों का खुलकर जिक्र किया। पानमती नामक महिला ने अधिकारियों को बताया कि यदि उन्हें आर्थिक सहायता मिल जाती तो वह अपने पति के लिए एक व्हीलचेयर खरीद लेतीं। उनके पति को चलने में भारी असुविधा होती है और वे केवल एक लाठी के सहारे ही किसी तरह आगे बढ़ पाते हैं। पति के अलावा परिवार में उनका कोई अन्य सहारा नहीं है। सीरसी सेंटर पहुंचने के बाद ही उन्हें मोबाइल कोर्ट तक जाने के लिए एक व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई थी। इसी प्रकार शाहपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले गुंजन यादव अपने दिव्यांग भाई को लेकर सीरसी सेंटर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनका भाई मोटराइज्ड साइकिल चलाने में पूरी तरह सक्षम है और इसका वीडियो भी केंद्र को सौंप चुका है। इसके बावजूद उन्हें पिछले कई सालों से लगातार कार्यालयों के चक्कर काटने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यदि उनके भाई को समय पर मोटराइज्ड साइकिल मिल जाती तो उनके जीवन में बहुत बड़ी राहत आ जाती और उन्हें रोजमर्रा के आवागमन में असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता।
अधिकारियों की मौजूदगी में सुनवाई
सीरसी सेंटर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में दिव्यांगजन मित्र संघ के अध्यक्ष अक्षय कुमार भी अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि समाज के इन जरूरतमंद लोगों को पेंशन और आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इसके अलावा आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसी अत्यंत आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से भी दिव्यांगजनों को वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि दिव्यांगजनों द्वारा अपना एक संगठन बनाकर अपनी आवाज को बुलंद करने के बावजूद उनकी शिकायतों पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हो रही है। इस कठिन परिस्थिति में जब प्रशासन या संबंधित विभाग उनकी नहीं सुन रहे हैं, तो उनके लिए इससे बड़ा कष्ट और कुछ नहीं हो सकता है। अक्षय कुमार ने यह भी खुलासा किया कि कुछ दबंग किस्म के लोग दिव्यांगजनों की जमीन पर अवैध कब्जा कर रहे हैं और इस गंभीर मामले में भी अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर भारत सरकार के दिव्यांगजन आयुक्त एस गोविंद राज विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ उप मुख्य आयुक्त विकास त्रिवेदी और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अवर सचिव मेराजुद्दीन ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और जनता की समस्याओं का जायजा लिया।
पंजीकृत मामले और त्वरित निस्तारण
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गोरखपुर जिले में कुल 26700 दिव्यांगजन पेंशन योजना के तहत पंजीकृत हैं। इन सभी पंजीकृत लोगों को सरकारी सहायता मिलने का प्रावधान है ताकि उनका जीवनयापन सुगमता से चल सके। मोबाइल कोर्ट के दौरान सामने आए अधिकांश मामले यूडीआईडी कार्ड बनवाने, पेंशन प्राप्त करने, बस पास हासिल करने और रेल पास से जुड़े हुए थे। इसके अलावा कुछ मामले पारिवारिक पेंशन और कुछ अन्य विवादों से भी संबंधित थे जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर देखा गया। अधिकारियों ने इन तमाम मामलों पर संज्ञान लेते हुए उनका त्वरित निस्तारण किया ताकि पीड़ित नागरिकों को तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। वर्तमान समय में इन सुविधाओं के अभाव में दिव्यांगजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से प्रशासन और सरकार के बड़े अधिकारी जमीनी स्तर की वास्तविकताओं से रूबरू हो रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि इन तमाम शिकायतों के त्वरित समाधान से गोरखपुर के दिव्यांग नागरिकों को भविष्य में प्रशासनिक योजनाओं का पूरा लाभ मिल सकेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।