छावनी में हुआ अद्भुत मंचन और वापसी का दृश्य
मेरठ शहर के भीतर श्री रामलीला कमेटी छावनी की तरफ से एक भव्य सांस्कृतिक आयोजन किया गया। इस आयोजन में प्रभु श्रीराम, माता सीता और उनके छोटे भाई लक्ष्मण के चौदह साल बाद अपनी पवित्र नगरी में लौटने की कथा का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपनी बेहतरीन कला से उस पौराणिक समय को जीवंत कर दिया जब पूरी अयोध्या नगरी अपने प्रिय राजकुमारों के स्वागत के लिए उत्सुक थी। रावण पर भारी विजय हासिल करने के बाद और माता सीता को उसकी कैद से पूरी तरह मुक्त कराने के बाद भगवान श्रीराम ने अपनी जन्मभूमि की ओर वापसी करने का पक्का निर्णय लिया था। इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे और उन्होंने इस सुंदर मंचन का पूरा आनंद उठाया। सभी कलाकारों ने अपनी भूमिका को बहुत ही निष्ठा और सुंदरता के साथ निभाया जिससे दर्शकों को ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे खुद उस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बन रहे हों। इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से शहर के लोगों में अपने प्राचीन इतिहास और परंपराओं के प्रति गहरा लगाव देखने को मिलता है।
भरत और अयोध्यावासियों में दौड़ी खुशी की लहर
भगवान श्रीराम के अपने घर वापस लौटने की शुभ खबर जैसे ही अयोध्या के लोगों तक पहुँची, पूरी नगरी खुशी से झूम उठी। प्रभु श्रीराम के लौटने का यह बहुप्रतीक्षित समाचार मिलते ही भरत और अन्य सभी अयोध्यावासियों के दिलों में खुशी की एक बड़ी लहर दौड़ गई। नगर के सभी लोगों ने मिलकर अपने प्रिय राजा और माता सीता के भव्य स्वागत के लिए विभिन्न प्रकार की तैयारियाँ बहुत उत्साह के साथ शुरू कर दीं। पूरे नगर को सुंदर और चमकीले दीपों से सजाया गया ताकि इस खुशी के मौके पर हर तरफ रोशनी बिखेरी जा सके। हर एक नागरिक ने अपने घरों और गलियों को दीपों से जगमगाया जिससे पूरा वातावरण अत्यंत मनमोहक हो गया। इस आयोजन के माध्यम से लोगों ने उस प्राचीन उल्लास को फिर से महसूस किया जब पूरी नगरी अपने आराध्य के स्वागत में उमड़ पड़ी थी। कमेटी के इस प्रयास से उपस्थित सभी लोगों का मन प्रफुल्लित हो गया और उन्होंने इस शानदार मंचन की सराहना की। इस प्रकार के आयोजनों से समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सांस्कृतिक एकता की भावना को भी बहुत बल मिलता है।
दीपावली का पर्व और सत्य की विजय का प्रतीक
इसी प्राचीन परंपरा और ऐतिहासिक घटना से हमारे देश में दीपावली के पावन पर्व को भगवान श्रीराम के वापस अयोध्या लौटने की घटना से जोड़ा जाता है। यह पूरी वापसी इस बात का बहुत बड़ा प्रतीक है कि हमेशा सत्य की ही जीत होती है और अंत में धर्म की ही स्थापना होती है। बुराई पर अच्छाई की इस महान जीत को याद करते हुए हर साल लोग रोशनी का यह पर्व बहुत धूमधाम से मनाते हैं। रावण जैसे अत्याचारी पर विजय पाने के बाद प्रभु श्रीराम का अपनी नगरी में लौटना केवल एक यात्रा नहीं बल्कि धर्म का मार्ग है। इस कथा से हमें यह गहरा संदेश मिलता है कि कठिन समय में भी धर्म का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। कमेटी छावनी द्वारा किए गए इस मंचन ने नई पीढ़ी को हमारी इस महान संस्कृति और परंपरा से भली-भांति परिचित कराने का काम किया है। इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य लोगों को उनके गौरवशाली अतीत से जोड़ना और नैतिक मूल्यों को बनाए रखना है। अयोध्या की यह पावन कथा आज भी हर भारतीय के दिल में श्रद्धा और उल्लास की एक नई ज्योति जलाती है।