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अवैध प्लाटिंग पर रोक: गोरखपुर विकास प्राधिकरण अवैध कालोनाइजर्स से सीधी बातचीत करेगा

गोरखपुर विकास प्राधिकरण अवैध प्लाटिंग पर शिकंजा कसने के साथ ही अब कालोनाइजर्स को वैध प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल जल्द ही एक सौ बीस से अधिक प्लाटर्स के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इस पहल का उद्देश्य मानकों को पूरा करने वाली कॉलोनियों का लेआउट पास कराना और डेवलपर्स की समस्याओं का समाधान करना है।

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Ankit Yadav
03 अक्ट 2026, 12:05
अवैध प्लाटिंग पर रोक: गोरखपुर विकास प्राधिकरण अवैध कालोनाइजर्स से सीधी बातचीत करेगा

अवैध निर्माण पर प्राधिकरण की सख्त कार्रवाई

गोरखपुर महानगर के बाहरी क्षेत्रों में इन दिनों अवैध प्लाटिंग का धंधा तेजी से फैल रहा है। बिना किसी स्वीकृति के मनमाने तरीके से कॉलोनियां बसाई जा रही हैं जिनमें आम नागरिक अपनी गाढ़ी कमाई से जमीन खरीद रहे हैं। गोरखपुर विकास प्राधिकरण को इस तरह की गतिविधियों के बारे में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्राधिकरण ने कई स्थानों पर चल रहे अवैध निर्माण कार्यों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि बिना नक्शा या लेआउट स्वीकृत कराए जमीन बेचना पूरी तरह से गैरकानूनी और नियम विरुद्ध है। प्राधिकरण इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार औचक निरीक्षण और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रहा है ताकि नियमों की अवहेलना करने वालों पर नकेल कसी जा सके और भविष्य में कोई भी डेवलपर नियमों को ताक पर रखकर ऐसा काम करने का साहस न जुटा सके। महानगर में सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तरह से सतर्क और मुस्तैद नजर आ रहा है।

प्लाटर्स के साथ होगी सीधी संवाद बैठक

अवैध प्लाटिंग के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच अक्सर यह शिकायत सामने आती थी कि बुलडोजर चलाने से पहले संबंधित लोगों का पक्ष नहीं सुना जाता है। इसी समस्या के समाधान और संवादहीनता को खत्म करने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने एक नया कदम उठाया है। उपाध्यक्ष जल्द ही क्षेत्र के एक सौ बीस से अधिक कालोनाइजर्स और प्लाटर्स के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक के दौरान सभी डेवलपर्स की व्यक्तिगत और सामूहिक समस्याओं को विस्तार से सुना जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर वे अपने प्रोजेक्ट्स का लेआउट क्यों पास नहीं करा पा रहे हैं। बैठक में प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी प्लाटर्स को लेआउट स्वीकृति के लिए जरूरी मानकों और पूरी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देंगे। अधिकारियों का मानना है कि कई बार सही जानकारी के अभाव में लोग छोटी सड़क छोड़ देते हैं और अवैध निर्माण कर बैठते हैं। यदि वे निर्धारित मानकों के अनुसार सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करते हैं तो उनका लेआउट आसानी से पास हो सकता है।

नए नियमों से विकास को मिलेगा बढ़ावा

गोरखपुर के बाहरी इलाकों में आवासीय क्षेत्र के रूप में भारी मांग बढ़ रही है क्योंकि यहां का बुनियादी ढांचा लगातार विकसित हुआ है। इसी बढ़ते दायरे को देखते हुए प्राधिकरण ने नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं जिनके तहत प्लाटिंग के लिए अब न्यूनतम क्षेत्रफल की कोई बाध्यता नहीं रखी गई है। डेवलपर के पास जितनी भी जमीन उपलब्ध होगी, उसे उसी अनुपात में सड़क, नाली और अन्य जरूरी आधारभूत सुविधाएं विकसित करनी होंगी। प्राधिकरण का यह भी मानना है कि जब कॉलोनियां मानक के अनुसार विकसित होंगी और उनका लेआउट पूरी तरह से वैध होगा, तो वहां बिकने वाले भूखंडों का मूल्य भी काफी बढ़ जाएगा। उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने स्पष्ट किया है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य डेवलपर्स के वास्तविक व्यवधानों को दूर करना और उन्हें जागरूक करना है ताकि वे भविष्य में बिना लेआउट स्वीकृति के कोई भी प्लाटिंग का कार्य न करें। इस सकारात्मक पहल से एक तरफ जहां अवैध निर्माण पर लगाम लगेगी, वहीं दूसरी तरफ गोरखपुर में सुनियोजित और वैध कॉलोनियों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

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