घाट पर मूर्ति विसर्जन के दौरान विवाद
बाराबंकी जिले के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गदाईपुर घाट पर प्रतिमा विसर्जन का कार्यक्रम चल रहा था। यह घटना बीस अक्टूबर की शाम को लगभग पांच बजे के आसपास की है। इस धार्मिक अनुष्ठान के सिलसिले में फतेहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सवितापुर गांव से एक पीड़ित युवक अपने परिजनों तथा अन्य ग्रामवासियों के साथ वहां उपस्थित था। जिस समय सभी लोग विसर्जन की प्रक्रिया में व्यस्त थे, उसी दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने वहां माहौल खराब करना शुरू कर दिया। आरोप है कि मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने अचानक से जातिसूचक गालियां देना आरंभ कर दिया। जब इस आपत्तिजनक आचरण का विरोध किया गया तो बात बढ़ने लगी और देखते ही देखते यह बहस एक गंभीर मारपीट में तब्दील हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां अफरातफरी का माहौल बन गया और विसर्जन का यह पावन कार्यक्रम हिंसा की भेंट चढ़ गया। पीड़ित पक्ष की ओर से इस मामले को लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी गई है और न्याय की गुहार लगाई गई है। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर भी इस मामले की चर्चा काफी तेज हो गई है।
युवती से अभद्रता और लोहे की रॉड से हमला
घटना के दौरान विरोध करने पर स्थिति अत्यंत भयावह हो गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपियों ने युवक की बहन के साथ घिनौनी हरकतें की और उसके साथ छेड़छाड़ की गई। मनबढ़ किस्म के लोगों ने युवती के बाल पकड़कर उसे जबरन जमीन पर गिरा दिया और उसके कपड़े भी फाड़ दिए गए। जब परिवार के अन्य सदस्यों और अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो हमलावरों ने उन पर भी कहर बरपा दिया। आरोप है कि हमलावरों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड जैसे खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल करके ताबड़तोड़ वार किए। इस जानलेवा हमले की चपेट में आकर शिकायतकर्ता, उसकी बहन, परिवार का एक अन्य युवक और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गए। शिकायतकर्ता के सिर पर लोहे की रॉड लगने से उसके सिर में काफी गहरी चोट आई है। वहीं उसकी बहन के पेट में गंभीर चोट लगने के कारण वहां से लगातार रक्तस्राव हुआ है। इस क्रूरता के बाद हमलावरों ने उन्हें दोबारा घाट की तरफ दिखने पर जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की खुली धमकियां भी दीं। मौके पर पुलिस के पहुंचने के बाद भी आरोपियों के तेवर ठंडे नहीं पड़े और वे लगातार अभद्र भाषा का प्रयोग करते रहे।
अस्पताल में उपचार और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र
इस हिंसक हमले में लहूलुहान हुए सभी घायलों को तत्काल प्रभाव से इलाज के लिए फतेहपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के दौरान उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार में भारी दहशत और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। पीड़ित पक्ष का यह भी गंभीर आरोप है कि उन्होंने इस पूरी घटना की जानकारी सबसे पहले स्थानीय थाने की पुलिस को दी थी। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने उनकी शिकायत पर किसी भी प्रकार की उचित कार्रवाई नहीं की। स्थानीय पुलिस की इस कार्यप्रणाली और उदासीनता से निराश होकर पीड़ित परिवार ने सीधे पुलिस अधीक्षक रवीना त्यागी के पास पहुंचकर एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा है। इस प्रार्थना पत्र में गुल्ले वर्मा, उपेंद्र वर्मा और बजरूल वर्मा का नाम मुख्य रूप से शामिल किया गया है। इसके अलावा पंद्रह से बीस अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी नामजद प्राथमिकी दर्ज करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई गई है।