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विभाजन की विभीषिका: वाराणसी में वक्ताओं ने कहा कि भारत का बंटवारा मजहब जनित त्रासदी थी और इसके घाव कभी नहीं भरेंगे

वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भारत के विभाजन को लेकर गहरी संवेदना और विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी धर्म के आधार पर हुई थी और इसके दर्दनाक निशान कभी भी मिट नहीं सकते।

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Kantap News डेस्क
15 अग 2026, 17:35
विभाजन की विभीषिका: वाराणसी में वक्ताओं ने कहा कि भारत का बंटवारा मजहब जनित त्रासदी थी और इसके घाव कभी नहीं भरेंगे
देश के विभाजन के दर्द और उसकी विभीषिका को याद करते हुए वाराणसी में विभिन्न मंचों पर चर्चाएं की गईं। इस दौरान बुद्धिजीवियों और विचारकों ने साझा रूप से माना कि राष्ट्र का यह बंटवारा किसी सामान्य राजनैतिक घटना से बढ़कर एक भीषण मजहब आधारित त्रासदी थी, जिसका असर आज भी समाज के मानस पटल पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

अत्याचारी दौर और अमिट निशान

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उस कालखंड में जिस प्रकार की मानवीय आपदा का सामना लोगों को करना पड़ा, उसके दुष्परिणाम पीढ़ियों तक महसूस किए जाते रहेंगे। इतिहास के उस दौर के जख्म इतने गहरे थे कि समय बीतने के साथ भी उन पर पूरी तरह मरहम नहीं लग पाया है। ऐतिहासिक तर्कों और अनुभवों के आधार पर यह बात सामने आई कि इस तरह की घटनाओं से सबक लेते हुए देश की सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। इस प्रकार के आयोजन पुरानी यादों को ताजा करने के साथ-साथ वर्तमान पीढ़ी को अतीत की सच्चाइयों से अवगत कराने का कार्य करते हैं।
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