राज्य के 10 जिलों में एटीएस की दबिश
उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता यानी एटीएस ने शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। लखनऊ सहित प्रदेश के कुल 10 जिलों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं। इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य शहजाद भट्टी के साथ जुड़े संदिग्ध व्यक्तियों और उनके नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करना है। पिछले चार महीनों के दौरान एटीएस ने इस नेटवर्क से जुड़ी कथित आतंकी गतिविधियों के मामले में 52 संदिग्धों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए एटीएस सीधे संदिग्धों के घरों और उनके संभावित गुप्त ठिकानों पर दबिश दे रही है। राज्य के इन 10 जिलों में चल रही इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा अधिकारी बारीकी से साक्ष्य जुटाने में लगे हैं ताकि इस पूरे तंत्र का पर्दाफाश किया जा सके। स्थानीय स्तर पर इन संदिग्धों की पहचान के बाद उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और अब छापेमारी के जरिए सीधे कार्रवाई की जा रही है।
सोशल मीडिया के जरिए नेटवर्क का विस्तार
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि शहजाद भट्टी का नेटवर्क मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को अपने साथ जोड़ रहा था। एटीएस के अधिकारी गिरफ्तार किए गए 52 संदिग्धों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहन पड़ताल कर रहे हैं। इस जांच में संदिग्धों की चैट, उनकी ऑनलाइन बातचीत और अन्य डिजिटल संपर्कों को खंगाला जा रहा है ताकि नेटवर्क के काम करने के तरीके को समझा जा सके। हिरासत में लिए गए लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है और इसी के आधार पर एटीएस नेटवर्क के अन्य सक्रिय सदस्यों की भूमिका को स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से उन तरीकों का पता लगाया जा रहा है जिनके माध्यम से युवाओं को भ्रमित करके इस नेटवर्क में शामिल किया जाता था। एटीएस की तकनीकी टीम डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए उन सभी लोगों की तलाश में जुटी है जो इस नेटवर्क को डिजिटल माध्यमों से मजबूती प्रदान कर रहे थे। इस प्रक्रिया में एटीएस हर उस तकनीकी माध्यम की बारीकी से जांच कर रही है जिसका उपयोग संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया गया।
चार महीने की जांच और नेटवर्क की जड़ें
शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ एटीएस की यह कार्रवाई पिछले चार महीनों से जारी गहन जांच का परिणाम है। इस अवधि के दौरान एटीएस ने एक-एक करके 52 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस नेटवर्क के विस्तार का पता चलता है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती रही है कि कैसे सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारों से जोड़ा जा रहा था। एटीएस अब तक मिली जानकारियों और गिरफ्तार लोगों के बयानों के आधार पर इस पूरे आतंकी ढांचे को तोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इन छापेमारी से प्राप्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से और भी कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस जांच का महत्व इस बात से भी है कि यह नेटवर्क राज्य के कई जिलों में फैला हुआ था, जिसे अब एक-एक करके चिह्नित किया जा रहा है। एटीएस की यह निरंतर कार्रवाई राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि को जड़ से खत्म करने के संकल्प को दर्शाती है।