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राजनीति

धार्मिक मेले हमारी धरोहर: मेलों का संरक्षण और संवर्धन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, यादविंदर गोमा का बयान

धार्मिक आस्था से जुड़े मेलों के संरक्षण और उनके संवर्धन को लेकर प्रदेश सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी है। इस दिशा में सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है ताकि हमारी प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

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Ankit Yadav
20 सित 2026, 11:00
धार्मिक मेले हमारी धरोहर: मेलों का संरक्षण और संवर्धन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, यादविंदर गोमा का बयान

हाल ही में सामने आए बयानों और आधिकारिक रुख के अनुसार, प्रदेश सरकार ने धार्मिक आस्थाओं से जुड़े मेलों के संरक्षण एवं संवर्धन को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। यादविंदर गोमा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राज्य की संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में इन मेलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिकता के दौर में जब पारंपरिक मूल्य पीछे छूट रहे हैं, ऐसे आयोजनों को राजकीय स्तर पर समर्थन मिलना न केवल उनकी निरंतरता को सुनिश्चित करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उनकी जड़ों से जोड़े रखता है। मेलों के आयोजन स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना इस नीति के प्रमुख केंद्र बिंदु हैं ताकि हर साल लगने वाले इन मेलों का स्वरूप और अधिक भव्य एवं व्यवस्थित हो सके।

सांस्कृतिक संदर्भ में देखा जाए तो भारत के विभिन्न राज्यों में पारंपरिक मेलों का इतिहास सदियों पुराना है, जो केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और व्यापार के भी बड़े मंच होते हैं। इन मेलों के माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्प, लोक कला, क्षेत्रीय खान-पान और पारंपरिक संगीत को एक बड़ा बाजार और पहचान मिलती है। पिछले कुछ वर्षों में यह महसूस किया गया कि समुचित संरक्षण के अभाव में कई ऐतिहासिक मेले अपनी रौनक खो रहे थे, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप और नीतिगत समर्थन की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। सरकार द्वारा इन आयोजनों को प्राथमिकता दिए जाने के पीछे यही मूल उद्देश्य है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिले और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिले, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकें। इस प्रकार की पहलों से न केवल मेलों का पारंपरिक स्वरूप सुरक्षित रहता है बल्कि उनमें समयानुकूल सुधार भी किए जाते हैं।

भविष्य की संभावनाओं और इसके व्यापक प्रभावों पर नजर डालें तो इस घोषणा के बाद से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े लोगों में एक सकारात्मक संदेश गया है। आने वाले समय में इन मेलों के प्रबंधन और उनके प्रचार-प्रसार में प्रशासनिक सहायता मिलने से पर्यटकों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इसी प्रकार वित्तीय अनुदान, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं के मोर्चे पर काम करती रही, तो ये मेले राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक नई पहचान बना सकेंगे। इसके अलावा, स्थानीय समितियों और पंचायत स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने से इन आयोजनों में पारदर्शिता और जनसहयोग दोनों में वृद्धि होगी, जो किसी भी सांस्कृतिक नीति की सफलता के लिए सबसे आवश्यक शर्त मानी जाती है।

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